![]()
मधेपुरा में आशा कार्यकर्ताओं ने सोमवार को सदर अस्पताल में एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन बिना स्पष्टीकरण दिए चयनमुक्त किए जाने के विरोध में था। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग के समक्ष अपनी विभिन्न लंबित मांगों को भी प्रमुखता से उठाया। बिहार राज्य आशा एवं आशा फैसिलिटेटर संघ की महामंत्री सुधा सुमन ने चयनमुक्ति को दुर्भाग्यपूर्ण और अन्यायपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि सोमवार को जब आशा कार्यकर्ता सिविल सर्जन से मिलने पहुंचे, तो वे कार्यालय में मौजूद नहीं थे, जबकि आंदोलन की सूचना पहले ही दी जा चुकी थी। सुधा सुमन ने मांग की कि आशा कार्यकर्ताओं की सेवा आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष की जाए। इसके अतिरिक्त, आशा फैसिलिटेटर को सेवानिवृत्ति पर 10 लाख रुपये का एकमुश्त भुगतान और प्रतिमाह 10 हजार रुपये पेंशन दी जाए। कार्यकर्ताओं ने यह भी मांग की कि कार्यरत आशा कार्यकर्ताओं की सेवा स्थायी की जाए। जब तक उन्हें सरकारी कर्मी का दर्जा नहीं मिलता, तब तक प्रत्येक आशा को वैधानिक रूप से 26 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाए। इसके साथ ही, सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में आशा कार्यकर्ताओं के बैठने के लिए समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग उठाई गई। जिला स्वास्थ्य समिति के जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) प्रिंस ने बताया कि कुछ प्रखंडों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों ने कुछ आशा कार्यकर्ताओं के विरुद्ध प्रशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा की थी। आशा कार्यकर्ता इस निर्णय पर पुनर्विचार की मांग कर रही हैं। डीपीएम ने आश्वासन दिया कि विभाग आशा कार्यकर्ताओं की मांगों पर गंभीरता से विचार कर रहा है। हालांकि, आशा कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
Source link