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मगध यूनिवर्सिटी के शिक्षकों और कर्मियों की बरसों पुरानी वेतन और पेंशन संबंधी समस्याओं को सुलझाने के लिए प्रशासन हरकत में आ गया है। बिहार लोकभवन के कड़े निर्देशों के बाद यूनिवर्सिटी में दो दिवसीय विशेष शिकायत निवारण शिविर की शुरुआत की गई है। बोधगया स्थित यूनिवर्सिटी कैंपस के मन्नूलाल केंद्रीय पुस्तकालय में इस शिविर का संचालन किया जा रहा है। शिविर का उद्घाटन कुलपति प्रोफेसर दिलीप कुमार केसरी की ओर से किया गया। इस अवसर पर यूनिवर्सिटी के वित्त पदाधिकारी इंद्र कुमार सिंह भी उपस्थित रहे। लोकभवन की इस सीधी पहल का उद्देश्य कार्यरत और सेवानिवृत्त कर्मियों की पेंडिंग फाइलों का समयबद्ध और तेजी से समाधान निकालना है। पहले ही दिन उमड़ी भीड़, आए 334 मामले शिविर के पहले दिन ही अपनी समस्याओं को लेकर बड़ी संख्या में कार्यरत और सेवानिवृत्त शिक्षक और कर्मचारी पहुंचे। दिनभर में कुल 334 मामले दर्ज किए गए। विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्राप्त सभी आवेदनों को कार्रवाई के लिए अलग-अलग श्रेणियों में बांट दिया है। पहले दिन आए मामलों में सबसे अधिक संख्या बकाया वेतन अंतर से जुड़ी रही। कुल 223 आवेदन बकाया वेतन अंतर के प्राप्त हुए। इनमें से 126 मामले शिक्षक वर्ग से हैं, जबकि 97 मामले शिक्षकेतर कर्मचारियों के हैं। इसके अलावा पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ से संबंधित कुल 117 शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें 33 सामान्य पेंशन मामले, चौथे फेज के 14 मामले और एसबी सिंह समिति से जुड़े पेंशनधारियों के 70 मामले शामिल हैं। मिशन मोड में काम करने का था निर्देश दरअसल, बिहार लोकभवन ने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों को पूर्व में कड़े निर्देश दिए थे। आदेश में कहा गया है कि कार्यरत और सेवानिवृत्त कर्मियों के वेतन व पेंशन संबंधी मामलों को 20 जुलाई तक मिशन मोड में निपटाया जाए। इसके बावजूद कई कर्मियों की फाइलें पेंडिंग रह गईं। इसी को देखते हुए राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने कड़ा संज्ञान लिया। उनके निर्देश पर ही 27 और 28 जुलाई को विश्वविद्यालय मुख्यालयों में विशेष शिविर आयोजित करने का फैसला किया गया। 14 अगस्त तक हर हाल में होगा समाधान यह विशेष शिकायत निवारण शिविर मंगलवार को भी जारी रहेगा। जो कर्मचारी या पेंशनभोगी पहले दिन आवेदन जमा नहीं कर पाए हैं, वे आज भी अपना आवेदन जमा कर सकते हैं।
मगध विश्वविद्यालय प्रशासन ने साफ किया है कि प्राप्त सभी आवेदनों को संबंधित विभागों में भेजकर उनका वर्गीकरण किया जा रहा है। लोकभवन के स्पष्ट निर्देशों का पालन करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन 14 अगस्त तक प्राप्त सभी 334 मामलों का अंतिम और समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करेगा। इस पहल से वर्षों से दफ्तरों के चक्कर काट रहे सेवानिवृत्त कर्मियों में उम्मीद की नई किरण जगी है।
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