Newswahni

मंत्री रत्नेश सदा के घर को नहीं तोड़ पाई पुलिस सहरसा में महीने पहले ऑर्डर हुआ आज कोर्ट कर्मी चेकिंग को पहुंचे रहे…




सहरसा के कहरा अंचल में रविवार को कोर्ट के आदेश के तहत दखल-दिहानी (कब्जा दिलाने) की कार्रवाई के दौरान जमकर हंगामा हुआ। अंचल अधिकारी (सीओ) निरंजन कुमार मिश्रा के देर से मौके पर पहुंचने से नाराज पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों ने उनकी गाड़ी का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सीओ पर पक्षपात का आरोप लगाया, जबकि सीओ ने इन आरोपों को निराधार बताया। मामला बरियाही वार्ड संख्या-11 निवासी 72 वर्षीय मो. इदरीश अंसारी और नगर निगम वार्ड संख्या-41 निवासी 70 वर्षीय प्रमोद कुमार पासवान की जमीन से जुड़ा है। देखें, मौके से आई तस्वीरें… सिलसिलेवार पढ़ें, पूरा मामला… जमीन पर कई परिवारों का अवैध कब्जा दोनों का कहना है कि उन्होंने वर्ष 1982 में पंचगछिया निवासी वेदानंद झा और निर्मला देवी से अलग-अलग सात कट्ठा 18 धुर 5 धुरकी जमीन रजिस्ट्री कराई थी। उनका आरोप है कि वर्षों से उनकी जमीन पर कई परिवारों ने अवैध कब्जा कर रखा है। पीड़ित बोले- कुछ लोगों ने जमीन-मकान कब्जाया प्रमोद कुमार पासवान ने बताया कि उन्होंने अपनी जमीन पर बाउंड्री बनाकर रहना शुरू कर दिया था, लेकिन बाद में कुछ लोगों ने उनके घर में आग लगाकर जमीन और मकान पर कब्जा कर लिया। वहीं मो. इदरीश अंसारी का कहना है कि उनकी जमीन पर 10 से 12 परिवारों ने अवैध कब्जा जमा रखा है। दोनों पीड़ितों ने कोटे में वाद दायर किया था दोनों पीड़ितों ने इस मामले में सहरसा व्यवहार न्यायालय में वाद दायर किया था। 1 अगस्त 1998 को तत्कालीन सब जज तृतीय राज किशोर लाल ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया। इसके बाद विरोधी पक्ष द्वारा हाईकोर्ट में दायर रिट याचिका खारिज कर दी गई। सहरसा अंचल प्रशासन की ओर से जमीन को सरकारी बताते हुए दायर याचिका भी हाईकोर्ट ने अस्वीकार कर दी। सब जज-1 की अदालत में कब्जा दिलाने का मुकदमा इसके बाद प्रमोद कुमार पासवान ने दोबारा सब जज-1 की अदालत में दखल-दिहानी के लिए वाद दायर किया। 30 सितंबर 2024 को अदालत ने जिला प्रशासन को अवैध कब्जा हटाकर दोनों वादियों को जमीन का कब्जा दिलाने का आदेश दिया। हालांकि आदेश के चार महीने बाद 5 जनवरी 2025 को तत्कालीन अंचलाधिकारी केवल स्थल निरीक्षण कर लौट गए और अमीन से नापी के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया। कार्रवाई नहीं होने पर फिर अदालत का गए पीड़ितों के अनुसार, कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने फिर अदालत का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद 11 मई 2026 को अदालत ने कहरा अंचलाधिकारी और जिला प्रशासन को आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। इसी क्रम में 26 जुलाई 2026 को जिला प्रशासन ने सीओ निरंजन कुमार मिश्रा के नेतृत्व में पुलिस बल के साथ दखल-दिहानी की कार्रवाई तय की। ढाई घंटे इंतजार के बाद कोर्ट कर्मी बिना कार्रवाई लौटे बताया गया कि कोर्ट के निर्देशानुसार न्यायालय के कर्मचारी, नाजिर, ढोलकिया और अन्य कर्मी सुबह 11 बजे ही मौके पर पहुंच गए थे, लेकिन मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात अंचलाधिकारी निर्धारित समय पर नहीं पहुंचे। करीब ढाई घंटे इंतजार के बाद न्यायालय के कर्मी बिना कार्रवाई किए लौट गए। दोपहर करीब 1:30 बजे जब सीओ मौके पर पहुंचे तो नाराज ग्रामीणों और पीड़ित परिवार ने उनकी गाड़ी का घेराव कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। पीड़ित मो. इदरीश अंसारी ने आरोप लगाया कि विवादित भूमि के एक हिस्से पर बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सादा का मकान बना हुआ है। उनका दावा है कि मंत्री अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर कोर्ट के आदेश के अनुपालन में बाधा डाल रहे हैं। मामले की शिकायत सीएम, राज्यपाल और गृह मंत्री से पीड़ित परिवार का कहना है कि इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री, राज्यपाल, गृह मंत्री और जिला प्रशासन तक की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं, कहरा के अंचल अधिकारी निरंजन कुमार मिश्रा ने पक्षपात के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रशासन न्यायालय के आदेश के अनुरूप ही कार्रवाई कर रहा है और किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जा रहा है। मंत्री रत्नेश सादा पर लगाए गए आरोप पीड़ित पक्ष के दावे हैं। इन आरोपों पर मंत्री की ओर से सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

🏠
Home
🎬
मनोरंजन
💰
धन
🌦️
मौसम
📢
Latest News
×
Scroll to Top