Newswahni

भागलपुर में वीं की छात्रा ने किया सुसाइड नानी के घर पर अकेली थी मां बोली डिप्रेशन में थी बेटी…




भागलपुर में 12वीं की छात्रा ने आज फंदे से झूलकर आत्महत्या कर ली। मामला, सजोर थाना क्षेत्र के दरियापुर स्थित पासवान टोला की है। मृतका की पहचान औद्योगिक थाना क्षेत्र के हवाई अड्डा के गोपालपुर निवासी मन्नू पासवान की बेटी सोनाली कुमारी (18) के रूप में हुई है। वह अपनी मां के साथ 15 दिन पहले ननिहाल आई थी। परिजनों ने शव को फंदे से लटकता हुआ देखा, जिसके बाद मृतका की मां को घटना की जानकारी दी गई। इधर, लोगों ने पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और फोरेंसिक टीम को बुलाया गया। मौके पर पहुंची फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से सभी सबूत एकत्रित किए। मृतक लड़की मानसिक रूप से परेशान थी। मां को नहीं पता सुसाइड का कारण मृतक लड़की ने इसी साल 12वीं पास की थी। वह पांच बहनों में तीसरे स्थान पर थी। घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मृतका की मां ने बताया कि वह अक्सर ननिहाल आती-जाती रहती थी। घटना के समय सभी लोग खेत में काम करने गए थे। घर पर एक छोटा बच्चा था, जिसकी देखभाल के लिए सोनाली को घर पर छोड़ा गया था। उसने आत्महत्या क्यों की, इसकी जानकारी नहीं है। मां ने यह भी बताया कि पिछले एक साल से वह मोबाइल फोन भी नहीं रखती थी। बेटी डिप्रेशन में थी। इधर, घटना के बाद मौके पर पहुंची फोरेंसिक टीम ने सभी साक्ष्य एकत्रित कर लिए हैं और आगे की कार्रवाई में जुटी हुई है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। थाना अध्यक्ष ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों का खुलासा हो सकेगा। डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि, “किशोर और युवा उम्र में मानसिक दबाव, अकेलापन, पारिवारिक या सामाजिक तनाव के कारण कई बार बच्चे अंदर ही अंदर टूटने लगते हैं। ऐसे मामलों में समय रहते बातचीत और भावनात्मक सहयोग बहुत जरूरी होता है। आत्महत्या किसी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि यह एक अस्थायी परेशानी का स्थायी और दुखद परिणाम बन जाता है। अगर किसी व्यक्ति के व्यवहार में अचानक बदलाव, चुप्पी, उदासी या अलग-थलग रहने की प्रवृत्ति दिखे, तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। परिजनों को चाहिए कि वे बच्चों और युवाओं से खुलकर बात करें, उन्हें जज न करें और उनकी बातों को गंभीरता से सुनें। जरूरत पड़ने पर तुरंत मनोचिकित्सक या काउंसलर से संपर्क करना चाहिए। सबसे जरूरी है कि ऐसे विचार आने पर व्यक्ति अकेला न रहे, अपने किसी करीबी, दोस्त या परिवार के सदस्य से तुरंत बात करे। सही समय पर मदद मिलने से ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।”



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

🏠
Home
🎬
मनोरंजन
💰
धन
🌦️
मौसम
📢
Latest News
×
Scroll to Top