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भागलपुर जिले का वां स्थापना दिवस दिवसीय समारोह शुरू तीन दिनों तक चलेगा संस्कृति कार्यक्रम पहले दिन निकाली गई प्रभात फेरी…




भागलपुर जिला स्थापना दिवस पर सोमवार को तीन दिवसीय समारोह का शुभारंभ हुआ। कला एवं संस्कृति विभाग और जिला प्रशासन के संयुक्त देखरेख में कार्यक्रम की शुरुआत भागलपुर संग्रहालय स्थित अंगर संस्कृति भवन में हुई। जिला पदाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी और वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार यादव ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। कार्यक्रम के पहले दिन प्रभात फेरी निकाली गई, जिसमें विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं, स्काउट-गाइड और कलाकारों ने भाग लिया। प्रभात फेरी को जिला कला और संस्कृति पदाधिकारी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जिसका समापन भागलपुर संग्रहालय परिसर में हुआ। यहां बच्चों के साथ कला, संस्कृति और जिले के इतिहास पर संवाद भी आयोजित किया गया। जिला स्थापना दिवस के अवसर पर भागलपुर के 253वें स्थापना वर्ष का जश्न मनाया जा रहा है। भागलपुर अंग संस्कृति की परंपरा के लिए जाना जाता 1773 में भागलपुर जिले के रूप में अस्तित्व में आया। जिसे अंग संस्कृति की समृद्ध परंपरा के लिए जाना जाता है। उद्घाटन समारोह में उप विकास आयुक्त, जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी सहित कई प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। उद्घाटन के मौके पर डीएम डॉ. चौधरी ने कहा कि भागलपुर अंग संस्कृति का प्रमुख केंद्र है, जहां विविध संस्कृतियां एक साथ विकसित होती हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन से स्थानीय परंपराओं को बढ़ावा मिलता है और लोगों में सांस्कृतिक जुड़ाव मजबूत होता है। एसएसपी प्रमोद कुमार यादव ने कहा कि भागलपुर अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। उन्होंने विक्रमशिला महाविहार, जर्दालू आम और रेशम उद्योग का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां की पहचान दूर-दूर तक है। उन्होंने जिलेवासियों को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दीं।
अंतिम दिन शैक्षणिक भ्रमण होगा तीन दिवसीय समारोह के तहत विभिन्न सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। पहले दिन प्रदर्श कला प्रतियोगिता के अंतर्गत समूह लोक नृत्य प्रस्तुत किए गए। वहीं, 5 मई को समूह लोक गायन प्रतियोगिता का आयोजन सुबह 11 बजे से अंग संस्कृति भवन में होगा। इसके अलावा फोटोग्राफी प्रतियोगिता, मंजूषा कला प्रदर्शनी, महात्मा गांधी पर आधारित आर्टिस्ट कैंप और स्कूली बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी कार्यक्रम का हिस्सा हैं। आयोजन के अंतिम दिन चयनित प्रतिभागियों को बटेश्वर स्थान और विक्रमशिला महाविहार के शैक्षणिक भ्रमण पर ले जाया जाएगा।



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