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बिहार में युवाओं के बीच तेजी से बढ़ रहे सूखे नशे (सिंथेटिक ड्रग्स) के प्रचलन का मुद्दा गुरुवार को बिहार विधान परिषद में प्रमुखता से उठा। कोशी क्षेत्र से राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के विधान पार्षद डॉ. अजय कुमार सिंह ने इस गंभीर समस्या पर सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए प्रभावी और सख्त कार्रवाई की मांग की। डॉ. सिंह ने सदन को बताया कि सूखे नशे का नेटवर्क गांव, कस्बों और शहरों तक फैल चुका है,जो आने वाली पीढ़ी के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है। नशे के कारण बढ़ रहा क्राइम उन्होंने कहा कि सरकार के पास एनडीपीएस एक्ट और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स जैसी व्यवस्थाएं मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद सूखे नशे पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। डॉ. सिंह ने जोर दिया कि यदि सरकार गंभीरता से पहल करे तो इस नेटवर्क को कुछ ही दिनों में ध्वस्त किया जा सकता है। डॉ. अजय ने चिंता व्यक्त की कि अखबारों में नशे के कारण परिवारों के टूटने माता-पिता के साथ मारपीट और हत्या जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। उन्होंने सदन से इस विषय पर राजनीति से ऊपर उठकर साझा जिम्मेदारी निभाने की अपील की। जदयू के प्रवक्ता ने भी किया समर्थन वहीं, जदयू के प्रवक्ता एवं विधान पार्षद नीरज कुमार ने भी डॉ.अजय द्वारा उठाए गए इस मुद्दे का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि बिहार में 15 से 25 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं द्वारा होने वाले कई अपराधों के पीछे सूखे नशे की लत एक बड़ी वजह बन रही है। नीरज कुमार ने सरकार से मांग की कि अन्य विभागों की तरह सूखे नशे की रोकथाम के लिए भी एक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर जारी किया जाए। इसके अतिरिक्त,डॉ. अजय ने जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) से संबंधित एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर नाबालिग बच्चों के बायोमैट्रिक फिंगरप्रिंट के आधार पर राशन का उठाव किया जा रहा है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के फिंगरप्रिंट के माध्यम से राशन वितरण की व्यवस्था पर रोक लगाने की मांग की। साथ ही पंचायत स्तर तक जनजागरूकता अभियान चलाकर इसकी निगरानी सुनिश्चित की जाए, ताकि युवाओं को नशे की गिरफ्त में जाने से बचाया जा सके।
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