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बिहार में शराब आ रही क्यों न आपको जिम्मेदार मानें अफसर बदले दिन बाद शराब कंपनियों को नोटिस पर पलटा विभाग किसका दबाव…




बिहार में 10 शराब कंपनियों पर कार्रवाई से मद्य निषेध विभाग पीछे हट गया है। विभाग अपनी तरफ से जारी कारण बताओ नोटिस को वापस लेने का निर्णय लिया है। वहीं, मद्य निषेध विभाग के सचिव के इस निर्णय को मंत्री ने गलत बताया है। शराब कंपनियों पर कार्रवाई का पूरा मामला क्या है, नोटिस जारी करने के बाद विभाग पीछे क्यों हटा, आखिर किसका दबाव है, जानेंगे; बूझे की नाही में…। सवाल-1ः शराब कंपनियों को नोटिस क्यों भेजा गया? जवाबः 11 जून को मद्य निषेध विभाग के मंत्री मदन सहनी की अध्यक्षता में एक बैठक हुई। इसमें बिहार में शराब की तस्करी रोकने की रणनीति बनाई गई। बताया जा रहा है कि इसी बैठक में तय हुआ कि तस्करी के दौरान जिस ब्रांड की शराब मिलेगी, उस कंपनी की भूमिका की भी जांच की जाएगी। कंपनियों के खिलाफ जांच के बाद FIR भी की जाएगी। इस निर्णय के बाद विभाग के अफसरों ने कार्रवाई तेज कर दी। इसी बीच 17 जुलाई को बक्सर में 6 चक्के वाली कंटेनर गाड़ी के भारी मात्रा में विदेश शराब जब्त हुई। जिसे लेकर बक्सर उत्पाद थाने की निरीक्षक प्रीति कुमारी ने 20 अगस्त को 10 शराब कंपनियों को नोटिस जारी किया। नोटिस में लिखा- आपके प्रतिष्ठान की बनी शराब बिहार में मिली है। क्यों नहीं इसके लिए आपको जिम्मेदार माना जाए। 10 साल के शराबबंदी के इतिहास में पहली बार था जब विभाग ने तस्करी के मामले में शराब कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इन 10 कंपनियों को जारी किया गया था नोटिस खास बात है कि इन कंपनियों के बॉटलिंग प्लांट पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, चंडीगढ़ और सिक्किम सहित अन्य राज्यों में हैं। सवाल-2ः नोटिस के बाद विभाग कार्रवाई से पीछे क्यों हटा? जवाबः नोटिस जारी होने के बाद 25-27 अगस्त के बीच शराब कंपनियों के एसोसिएशन कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहलिक बेवरेज कंपनीज (CIABC) ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने विभाग के सचिव 2007 बैच के IAS अफसर संजय कुमार सिंह से मुलाकात की। उन्हें ज्ञापन सौंपा। एसोसिएशन के डायरेक्टर जनरल अनंत एस अय्यर ने ज्ञापन में कहा, ‘जब्त शराब की बोतलों पर ब्रांड का नाम होने मात्र से निर्माता कंपनी या उसके अधिकारियों पर प्राथमिकी दर्ज नहीं की जानी चाहिए। दूसरे राज्यों में कानूनी रूप से बेची गई शराब को तीसरे पक्ष के तस्कर बिहार लाते हैं। इसमें कंपनियों की कोई भूमिका नहीं होती।’ इसके बाद विभागीय सचिव ने कंपनियों पर कार्रवाई से इनकार कर दिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को नोटिस वापस लेने का निर्देश दिया है। 14 अक्टूबर को समीक्षा बैठक में सचिव ने कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई से इनकार कर दिया। सचिव ने कहा, ‘कंपनी पर कार्रवाई करने से मामला कोर्ट में जाएगा। इसके चलते विभाग को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।’ सवाल-3ः कार्रवाई नहीं करने का दबाव है क्या? जवाबः पक्के तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता। बस प्रशासनिक गतिविधियों की टाइमलाइन देखिए… मंत्री ने नोटिस वापस लेने के फैसले पर जताई आपत्ति मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के मंत्री मदन सहनी ने कहा, ‘विभाग की बैठक में शराब निर्माता कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई का निर्णय लिया गया था। विभाग की सहमति से ही 10 कंपनियों को नोटिस जारी किया गया था। सचिव ने नोटिस वापस लेने का निर्णय लिया है, जो गलत है।’ सवाल-4ः मंत्री के आदेश को पलटने वाले सचिव कौन हैं? जवाबः संजय कुमार सिंह 2007 बैच के बिहार कैडर के IAS अधिकारी हैं। लंबे समय से राजस्व और आर्थिक मामलों से जुड़े विभागों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। तेज-तर्रार और टास्क सुलझाने वाले अफसर बिहार की ब्यूरोक्रेसी में संजय सिंह की पहचान तेज-तर्रार और काबिल अधिकारी के रूप में है। उन्हें टास्क सुलझाने, काम कराने के बढ़िया तरीकों के लिए जाना जाता है।



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