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बक्सर धसने को लेकर इंजीनियर सस्पेंड मरम्मत का खर्च सैलरी से वसूला जाएगा मंत्री के निर्देश पर एक्शन…




बक्सर में नवनिर्मित रेल ओवरब्रिज (ROB) के क्षतिग्रस्त होने के मामले में बिहार सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। पथ निर्माण मंत्री ई. शैलेन्द्र कुमार के निर्देश पर तीन अभियंताओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत का खर्च संबंधित अभियंताओं के वेतन से वसूला जाएगा। यह आरओबी इटाढ़ी रेलवे गुमटी के पास स्थित है। आम जनता के लिए आवागमन शुरू होने के मात्र 10 दिन बाद 5 जून को इसके पाया संख्या-5 के समीप स्लैब क्षतिग्रस्त हो गया था। इस घटना के बाद से ही निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे थे। पुल पर गाड़ियों की आवाजाही रोक दी थी घटना के बाद प्रशासन ने पुल पर वाहनों की आवाजाही रोक दी थी और तकनीकी जांच शुरू की गई थी। मामले में पहले ही निर्माण एजेंसी (संवेदक) के खिलाफ मुफ्फसिल थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई जा चुकी है। हालांकि, घटना के बाद से ही निर्माण कार्य की निगरानी करने वाले अभियंताओं की जवाबदेही तय करने की मांग उठ रही थी। मंत्री कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, प्रारंभिक जांच में लापरवाही सामने आने के बाद इन तीन अभियंताओं को निलंबित किया गया है। पूरे मामले की विस्तृत विभागीय जांच अभी जारी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद अन्य जिम्मेदार अधिकारियों या कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की संभावना है। निगरानी से जुड़े सभी पहलुओं की जांच जारी सूत्रों के मुताबिक, निर्माण कार्य की गुणवत्ता, तकनीकी मानकों का अनुपालन, निरीक्षण प्रक्रिया और कार्यस्थल पर की गई निगरानी से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि परिचालन शुरू होने के कुछ ही दिनों के भीतर पुल का स्लैब क्षतिग्रस्त कैसे हो गया। इस सरकारी कार्रवाई के बाद पथ निर्माण विभाग और बिहार राज्य पुल निर्माण निगम में हलचल तेज हो गई है। विभागीय स्तर पर इसे एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि सार्वजनिक परियोजनाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वैकल्पिक मार्गों से आना-जाना कर रहे लोग इधर, आरओबी बंद रहने से बक्सर शहर और आसपास के इलाकों के लोगों को अब भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों को वैकल्पिक मार्गों से आवागमन करना पड़ रहा है, जिससे समय और दूरी दोनों बढ़ गए हैं।
अब सबकी नजर विभागीय जांच पर टिकी है। जनता यह जानना चाहती है कि करोड़ों रुपये की लागत से बने इस आरओबी के क्षतिग्रस्त होने के पीछे आखिर जिम्मेदार कौन है और क्या कार्रवाई केवल निलंबन तक सीमित रहेगी या पूरे मामले में व्यापक जवाबदेही भी तय की जाएगी।



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