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बक्सर में दोषियों को साल कैद नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म का मामला पीड़िता को लाख रुपये मुआवजा राशि बैंक में सुरक्षित रहेगी…




बक्सर व्यवहार न्यायालय स्थित पॉक्सो कोर्ट-6 ने नाबालिग छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म मामले में शुक्रवार को अहम फैसला सुनाया। विशेष न्यायाधीश अमित कुमार शर्मा की अदालत ने दो दोषियों बिट्टू चौधरी और टेंगरी उर्फ अमिताभ बच्चन को 20-20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने पीड़िता को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया। घटना 26 जनवरी 2023 की विशेष अपर लोक अभियोजक सुरेश सिंह ने बताया कि यह घटना 26 जनवरी 2023 की है। सिकरौल थाना क्षेत्र के एक गांव की नाबालिग छात्रा स्कूल में आयोजित झंडोत्तोलन समारोह में शामिल होने गई थी। दोपहर तक घर वापस न लौटने पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की, जिसके बाद पता चला कि उसे बिट्टू चौधरी के घर के पास देखा गया था। बहला-फुसलाकर साथ ले गए पीड़िता ने अपने बयान में बताया था कि पहले विकास नामक युवक उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया और गलत नीयत से जबरदस्ती करने का प्रयास किया। बाद में बिट्टू चौधरी और टेंगरी उर्फ अमिताभ बच्चन वहां पहुंचे और विकास को भगा दिया। इसके बाद दोनों ने नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद पीड़िता की मां ने महिला थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस ने मामले की जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। विकास कुमार को नाबालिग होने के कारण पहले ही जुवेनाइल कोर्ट भेजा जा चुका है। बयान- मेडिकल रिपोर्ट पर फैसला सुनवाई के दौरान अदालत ने पीड़िता के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों को गंभीरता से लिया। इन्हीं के आधार पर दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया गया। कोर्ट ने बिट्टू चौधरी पर 50 हजार रुपये और टेंगरी उर्फ अमिताभ बच्चन पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने नाबालिग पीड़िता को 10 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। यह राशि बैंक में सुरक्षित जमा रहेगी। पीड़िता 18 वर्ष की आयु तक केवल उसका मासिक ब्याज ही निकाल सकेगी, जबकि बालिग होने के बाद वह पूरी राशि की हकदार होगी। मां को भी 5 लाख मुआवजे का आदेश इसके अलावा कोर्ट ने पीड़िता की मां को भी ‘पीड़ित’ की श्रेणी में शामिल करते हुए 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है और पीड़िता के पिता व्यसन के शिकार हैं, ऐसे में मां को भी सहायता मिलनी चाहिए।
अदालत के इस फैसले को महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों पर सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।



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