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प्रसाद हॉस्पिटल अग्निकांड की जांच रिपोर्ट आ गई है। जिसमें खुलासा हुआ है कि अस्पताल की 5वीं मंजिल नगर निगम से स्वीकृत नहीं थी, फिर भी वहां आईसीयू था। नगर निगम से बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोल और चौथी मंजिल तक का ही नक्शा स्वीकृत था। वहीं, दूसरी तरफ आईसीयू में क्षमता से अधिक बेड लगे थे। बेड की संख्या होनी चाहिए थी 15 पर 27 मरीज भर्ती थे। 12 मरीज अधिक भर्ती किए गए थे। 5 सदस्यीय टीम ने बुधवार शाम जांच रिपोर्ट डीएम सुब्रत कुमार सेन को सौंप दी है। डीएम ने नगर आयुक्त को भवन मानकों के उल्लंघन के मामले में अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। दरअसल, 4 जून को आईसीयू में आग लगी थी, जिसमें 7 मरीजों की मौत हो गई थी। हादसे के बाद की तस्वीरें… ओवरलोडिंग ने ली 7 जानें विशेषज्ञों का मानना है कि आईसीयू में बेड की संख्या बढ़ने से मरीजों के बीच न्यूनतम सुरक्षित दूरी घट जाती है। इससे ऑक्सीजन पाइपलाइन, मॉनिटरिंग उपकरण, बिजली के तार और इमरजेंसी गेट पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। आग जैसी स्थिति में यही ओवरलोडिंग जानलेवा साबित हो सकती है।
मॉनिटर से बेड तक पहुंची आग हादसे की शुरुआत शॉर्ट-सर्किट से हुई थी। आईसीयू में लगे मल्टी-पैरामीटर मॉनिटर में सबसे पहले आग लगी। इसके बाद आग मरीज के बेड तक पहुंच गई। रिपोर्ट में इसी आग के फैलने की मुख्य वजह माना गया है। जांच कमेटी का नेतृत्व एडीएम आपदा शैलेश कुमार चौधरी ने किया। सिविल सर्जन, पूर्वी अनुमंडल पदाधिकारी, जिला अग्निशमन पदाधिकारी और टाउन डीएसपी शामिल थे। छह दिनों तक अस्पताल, दस्तावेजों और संबंधित पक्षों से पूछताछ के बाद रिपोर्ट तैयार की गई। DM बोले रिपोर्ट की की जा रही समीक्षा डीएम सुब्रत कुमार सेन ने बताया कि जांच कमेटी ने रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट की विस्तृत समीक्षा की जा रही है। नक्शा के विपरीत भवन बना हुआ है। नगर आयुक्त को इसके लिए प्रसाद हॉस्पिटल के प्रबंधन को नोटिस जारी करने का आदेश दिया गया है। प्रसाद हॉस्पिटल की आईसीयू में आग लगने से 7 मरीजों की मौत मामले में एफआईआर दर्ज हुई थी। जिसके बाद 5 आरोपित सामने आ चुके हैं। पुलिस ने डॉ. पंकज कुमार, कर्मी अजीत कुमार और राम कुमार को गिरफ्तार किया था। अस्पताल के मालिक डॉ. उपेंद्र प्रसाद और उनकी पत्नी मीना प्रसाद कोर्ट में सरेंडर कर चुकी हैं। कोर्ट से पांचों को बेल मिल चुकी है। पुलिस ने इनकी भूमिका पर जांच शुरू कर दी है। पुलिस की ओर से केस डायरी दाखिल की जाएगी। एफआईआर में शिकायतकर्ता अनुमंडल अग्निशामालय अधिकारी ने किसी को नामजद नहीं किया था। अस्पताल के मालिक पर कार्रवाई की मांग की थी।
4 जून को एफआईआर दर्ज हुई थी आरोपितों की बेल का विरोध करने वाले मुख्य अभियोजक शिवमुनि ने कहा कि बेहद गंभीर मामले में किसी को नामजद नहीं किया या है। अब पुलिस स्तर से जांच की जाएगी। पांचों के अलावा अन्य की भी भूमिका की पुलिस जांच कर सकती है। केस दर्ज होने के बाद भी डॉक्टर और दो कर्मियों की गिरफ्तारी और कोर्ट में पेश करने के बिंदु पर पुलिस को अदालत में स्पष्टीकरण दाखिल करना है। ब्रह्मपुरा थाने में 4 जून को एफआईआर दर्ज हुई थी।
शहर के सभी अस्पतालों की होगी जांच प्रसाद हॉस्पिटल अग्निकांड के बाद स्वास्थ्यव्यवस्था पर उठे सवालों के बीच अब विभाग सख्त कार्रवाई के मूड में है। इस कड़ी में शहर के सभी अस्पतालों की आईसीयू की जांच के लिए विशेष धावा दल का गठन किया जाएगा। दल पूरी तरह स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का होगा, जो अस्पतालों में आईसीयू की वास्तविक स्थिति की जांच करेगा। आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों तत्काल राहत देने के इंतजामों की भी पड़ताल होगी। सिविल सर्जन ने बताया कि आईसीयू के निरीक्षण के लिए विशेष दल का गठन किया जाएगा। जांच में कमियां मिलने पर कार्रवाई होगी।
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