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पूर्णिया में सरहुल बाहा पूजा को लेकर आदिवासियों में गजब का उत्साह दिखाई दे रहा है। राजकीय महोत्सव के रूप में इसे शहर के आदिवासी विकास परिषद कार्यालय प्रांगण में मनाया जा रहा है। सरहुल पूजा के बाद आदिवासी समाज के लोगों ने विशाल सरहुल शोभा यात्रा निकाली। आदिवासियों के सबसे बड़े पर्व में मंत्री लेशी सिंह, सांसद पप्पू यादव, विधायक विजय खेमका, मेयर विभा कुमारी और समाजसेवी जितेंद्र यादव, भाजपा शामिल हुए। सरहुल बाहा पूजा महोत्सव समिति हांसदा तरबन्ना गुलाबबाग समेत कई स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए गए। सरहुल पूजा में बिहार अनुसूचित जनजाति उपाध्यक्ष शैलेंद्र गढ़वाल और पूर्णिया की महापौर विभा कुमारी बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। महापौर विभा कुमारी और पूर्व विधानसभा प्रत्याशी जितेंद्र यादव ने विधिवत पूजा-अर्चना कर सभी के सुख-समृद्धि की कामना की और आदिवासी समाज के पारंपरिक नृत्य और शोभा यात्रा में भी भाग लिया। शोभा यात्रा में हजारों की संख्या में आदिवासी समाज की महिलाएं और पुरुष शामिल रहे। महिलाओं संग मेयर विभा कुमारी ने भी पारंपरिक नृत्य किया, जबकि उनके पति जितेंद्र यादव प्रकृति गीतों पर वाद्य यंत्र बजाते दिखाए दिए। आदिवासियों के महान पर्व सरहुल बाहा पूजा को लेकर स्थानीय राजेंद्र बाल उद्यान और पूर्णिया आदिवासी विकास परिषद कार्यालय प्रांगण को दुल्हन की तरह सजाया गया है। महोत्सव रात गए 10 बजे तक चलेगा। महोत्सव में आदिवासी महिलाएं और पुरुषों ने सांस्कृतिक गीतों की धुन पर सामूहिक आदिवासी नृत्य की प्रस्तुति दे रही हैं। न सिर्फ पूर्णिया और कटिहार बल्कि बंगाल और नेपाल से लोग इस महोत्सव में शामिल होने और इसका हिस्सा लेने पहुंचे हैं। आयोजकों के मुताबिक 20 हजार लोग इस राजकीय महोत्सव में शामिल हैं। पूजा में अलग-अलग गांवों से आदिवासी नृत्यमंडली पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ पूजा में शामिल होने पहुंचे हैं। प्राकृतिक शक्ति सरना चाला आयो की पूजा अर्चना करने के बाद मांदर और नगाड़े पर आदिवासी समुदाय के लोगों ने नृत्य की प्रस्तुति से लोगों का मन मोह रखा है। सरहुल पूजा को लेकर नगर निगम की ओर से शहर में विशेष व्यवस्था की गई थीं। सभी पूजा स्थलों पर साफ-सफाई, पेयजल, प्रकाश और शौचालय की व्यवस्था की गई, जिसकी आमजन ने सराहना की। महापौर विभा कुमारी ने कहा कि आदिवासी समाज प्रकृति के सबसे निकट होता है और उनकी जीवनशैली प्रकृति संरक्षण का सर्वोत्तम उदाहरण है। सभी को जोहार देते हुए सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। पूर्व प्रत्याशी जितेंद्र यादव ने कहा कि सरहुल प्रकृति और फूलों का पर्व है, जो धरती माता को समर्पित है। इसी दिन से नए कृषि कार्यों की शुरुआत होती है और यह पर्व पर्यावरण संरक्षण एवं आपसी भाईचारे का संदेश देता है। उन्होंने सभी से सामाजिक समरसता बनाए रखने का आह्वान किया। कहा कि वे शुरुआत से ही आदिवासी समाज से जुड़े हैं। इस समाज के लोग सच्चे और सबका आदर करने वाले होते हैं। इसलिए वे इस समाज की भाई बहनों के साथ हर परिस्थिति में खड़े रहे हैं। हर साल की भांति इस साल भी शोभा यात्रा और सरहुल पूजा में शरीक हुए। आदिवासी विकास परिषद के अध्यक्ष विजय उरांव ने इस पर्व की महत्ता को लेकर कहा कि इसमें प्रकृति की पूजा की जाती है। प्राकृतिक शक्ति चाला आयो से प्रार्थना की जाती है कि जिस तरह प्रकृति पुराने पत्तों को हटा कर नए पत्तों एवं नव जीवन, उत्साह, उमंग, खुशहाली और उन्नति भरती है। इस सरहुल पूजा महोत्सव में स्थानीय ग्रामीणों के अलावा दूसरे जिलों से भी लोग हजारों की संख्या में आते हैं। साथ ही साथ हमारे पड़ोसी राज्य बंगाल और झारखंड के अलावा पड़ोसी देश नेपाल से भी श्रद्धालु आते हैं।
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