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पूर्णिया जिले के मरंगा बिंद टोली गांव के ग्रामीणों ने मृत्यु भोज की प्रथा का पूर्ण रूप से बहिष्कार करने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया है। इस पहल को समाज में व्याप्त एक सामाजिक कुरीति को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह पहल मरंगा बिंद टोली के वार्ड नंबर 8 के पूर्व पार्षद प्रतिनिधि ललन यादव उर्फ लालू यादव के नेतृत्व में हुई। हाल ही में गांव के एक ही परिवार में मां-बेटे की मृत्यु के बाद, शोकाकुल परिवार पर मृत्यु भोज आयोजित करने का दबाव था। परिवार इस प्रथा को लेकर असमंजस में था। इसके बाद, समाज के बुद्धिजीवी वर्ग के सदस्य, जिनमें सुरेंद्र यादव, पूर्व सरपंच दिनेश यादव, प्रेमचंद यादव, उमेश यादव और ललन यादव शामिल थे, शोकाकुल परिवार से मिलने पहुंचे। परिवार ने अपनी आर्थिक और भावनात्मक परेशानी बताई। इसके उपरांत शनिवार को गांव में एक आम बैठक बुलाई गई, जिसमें सर्वसम्मति से यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया कि अब से पूरे गांव में कोई भी परिवार मृत्यु भोज का आयोजन नहीं करेगा। बैठक में लिए गए निर्णय का एक पंचनामा भी तैयार किया गया। इस पर गांव के दर्जनों लोगों ने मृत्यु भोज न करने की सहमति जताते हुए हस्ताक्षर किए। ग्रामीणों ने बताया कि मृत्यु के बाद परिवार पहले से ही शोक और आर्थिक संकट से जूझ रहा होता है। मृत्यु भोज की प्रथा ऐसे समय में परिवार पर अतिरिक्त बोझ डालती है। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को अक्सर इसके लिए कर्ज लेना पड़ता है, और कई बार तो उन्हें अपनी जमीन तक बेचनी पड़ती है। इस महत्वपूर्ण बैठक में गांव के कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे, जिनमें प्रदीप यादव, अरुण यादव, मिथिलेश कुमार, रमेश कुमार, बमबम कुमार विनय, गौतम यादव, बिंदेश्वरी यादव, रवि रंजन कुमार, केशव आनंद, ब्रजकिशोर यादव, रजनीश कुमार, उषा देवी, चित्रलेखा देवी, रीता देवी, मनीषा कुमारी, अमृता कुमारी और रतन देवी शामिल थे।
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