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पटना में बंटी किडनैपिंग मर्डर केस के मुख्य आरोपी का एनकाउंटर पुलिस की गाड़ी देखते ही फायरिंग की जवाब में पुलिस वालों ने…




पटना के बंटी यादव हत्याकांड का मुख्य आरोपी और कुख्यात अपराधी रवीश उर्फ बसिया गुरुवार को पटना में पुलिस मुठभेड़ में घायल हो गया। बुद्धा कॉलोनी थाना क्षेत्र में एलएनटी से पूरब बांस घाट जाने वाले कच्चे रास्ते पर यह मुठभेड़ हुई। आरोपी ने पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की। गोली रवीश के दाहिने पैर में लगी। उसे इलाज के लिए PMCH में भर्ती कराया गया है। सिलसिलेवार तरीके से जानिए मुठभेड़ की पूरी कहानी… पुलिस पर फायरिंग, बोनट पर लगी गोली बंटी यादव की किडनैपिंग और मर्डर केस में पटना पुलिस रवीश को खोज रही थी। सूचना मिली थी कि रवीश एलएनटी घाट से होते हुए पटना लौट रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम जैसे ही उस इलाके में पहुंची, तभी आरोपी ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। फायरिंग के दौरान एक गोली कोतवाली थाना की सरकारी गाड़ी की बोनट पर लगी। हालांकि गाड़ी में मौजूद थाना प्रभारी (SHO) समेत अन्य पुलिसकर्मी बाल-बाल बच गए। इसके बाद पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की, जिसमें आरोपी के पैर में गोली लगी। हत्या के बाद से था फरार पुलिस के मुताबिक, बंटी यादव की हत्या के बाद से रवीश लगातार फरार चल रहा था। उसकी गिरफ्तारी के लिए कई दिनों से छापेमारी की जा रही थी। गुरुवार को उसके पटना आने की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने जाल बिछाया, जिसके दौरान मुठभेड़ हुई। रवीश पर पटना के कई थानों में लूट-रंगदारी और हत्या के प्रयास जैसे संगीन मामले दर्ज हैं। घटनास्थल से हथियार बरामद मुठभेड़ के बाद घटनास्थल से आरोपी की चप्पल और एक देसी कट्टा बरामद किया गया है। पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने के लिए FSL (फॉरेंसिक साइंस लैब) की टीम को भी मौके पर बुलाया है। घटनास्थल पर लॉ एंड ऑर्डर ASP कृष्ण मुरारी प्रसाद, DIU, SIU और कोतवाली थाना पुलिस की टीम मौजूद रही। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और बरामद हथियार की भी फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी। 6 जुलाई को जंक्शन से किया था किडनैप बता दें कि 6 जुलाई को बंटी का पटना जंक्शन के पास स्थित टाटा पार्क के समीप से अपहरण कर लिया गया था। अपहरण के 5 दिन बाद (11 जुलाई) को उसका शव पटना से करीब 60Km दूर अथमलगोला में मिला। शव की हालत बेहद खराब थी। चेहरा बुरी तरह कुचला हुआ था, जिससे आंख और नाक की पहचान करना मुश्किल था। बायां हाथ सुरक्षित था, लेकिन दाहिने हाथ में केवल हड्डियां बची थीं। पूरे शरीर पर चोट के गहरे निशान थे और शव गलना शुरू हो चुका था।



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