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बिहार की राजनीति में इन दिनों चर्चाओं का बाजार गर्म है। एक तरफ जहां नीतीश कुमार के राज्यसभा में जाने के समीकरण पर चर्चा हो रही है, वहीं एक नए नाम की एंट्री की आहट सुनाई दे रही है। यह नाम है निशांत कुमार जो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे हैं। केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के फायर ब्रांड नेता गिरिराज सिंह ने निशांत कुमार को राजनीति में सक्रिय होने का सुझाव दिया है। पत्रकारों से बात करते हुए बेगूसराय में गिरिराज सिंह ने नीतीश कुमार के शासन की सराहना की। उन्होंने कहा है कि नीतीश कुमार बिहार के एक ऐसे राजनेता रहे जिन्होंने दो दशक तक कुशलता के साथ बिहार के विकास को ऊपर ले जाने का काम किया। निशांत कुमार के राजनीति में आने का ये सही समय आज भी वह जो निर्णय लेते हैं खुद निर्णय लेते हैं। वह सही वक्त पर सही निर्णय लेते हैं। निशांत कुमार के लिए उनका जो पूरा वोट बैंक एक है। उस वोट बैंक की मांग है कि निशांत कुमार को अब राजनीति में आनी चाहिए मेरा भी मानना है कि यही समय है, सही समय है निशांत कुमार को सत्ता की राजनीति में आने का। इस दौरान गिरिराज सिंह ने बगैर नाम लिए पश्चिम बंगाल के ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर जोरदार तंज कसा है। गिरिराज सिंह ने कहा है कि टीएमसी सरकार घबराई हुई है, टीएमसी के खिलाफ जनता में आक्रोश है। टीएमसी ने 26000 शिक्षक को रद्द किया। ऐसे लाखों युवा हैं, उनमें आक्रोश है। टीएमसी ने कर्मचारियों को सातवां पे कमीशन नहीं दिया है। भारतीय जनता पार्टी की सरकार वहां आएगी और शिक्षा को की बहाली होगी। कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग का लाभ मिलेगा। महिलाओं को उड़ीसा की तरह बंगाल में 3000 रुपया दिया जाएगा। सेल्फ हेल्प ग्रुप को लखपति दीदी बनाया जाएगा। वोट से टीएमसी का अंगूठा काटेगी गिरिराज सिंह ने कहा कि पश्चिम बंगाल के हालत और भारतीय जनता पार्टी के निर्णय से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सरकार घबराई हुई है। पश्चिम बंगाल की जनता इस बार वोट से टीएमसी का अंगूठा काट लेगी। वहां से बांग्लादेशी घुसपैठियों को निकाला जाएगा, गुंडों को उल्टा लटका दिया जाएगा। बंगाल में मतदाता सूची के शुद्धिकरण जैसे गंभीर विषय पर भी राजनीति करना दुर्भाग्यपूर्ण है। लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है कि वोटर लिस्ट पारदर्शी और निष्पक्ष हो। इसे रोकने के लिए धरना-प्रदर्शन करना साफ दर्शाता है कि कुछ लोग सच्चाई सामने आने से घबराते हैं। बंगाल की जनता अब तुष्टिकरण और राजनीतिक नाटक को समझ चुकी है। लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मतदाता सूची का सही और पारदर्शी होना जरूरी है।
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