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पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) में रैगिंग के आरोप में दो महीने के लिए निलंबित सात एमबीबीएस छात्र बुधवार को भी कक्षाओं में पहुंचे। कॉलेज प्रशासन ने उन्हें क्लास से निलंबित करने का आदेश दिया था, लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा है। शिक्षक छात्रों को क्लास में बैठने से नहीं रोक रहे हैं। हालांकि, उनकी हाजिरी नहीं बनाने का निर्देश दिया गया है। एनएमसी के निर्देश पर हुई थी कार्रवाई मामला 2024 और 2025 बैच के सात छात्रों से जुड़ा है। उन पर जूनियर छात्रों के साथ रैगिंग करने का आरोप है। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) के निर्देश पर कॉलेज प्रशासन ने कार्रवाई की। पांच छात्रों को बुधवार को निलंबित किया गया, जबकि दो छात्रों पर करीब एक सप्ताह पहले कार्रवाई हुई थी। निलंबन के बाद भी छात्र हॉस्टल में रह रहे हैं और नियमित कक्षाओं में पहुंच रहे हैं। हॉस्टल वार्डन उन्हें बाहर नहीं कर पा रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि आदेश का पालन कराना कॉलेज प्रशासन की जिम्मेदारी है। आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है यह भी आरोप लगा है कि निलंबित छात्र 2026 बैच के जूनियर विद्यार्थियों से लिखवा रहे हैं कि उनके साथ रैगिंग नहीं हुई। इसके बाद उनके हस्ताक्षर प्राचार्य के सामने रैगिंग नहीं होने के प्रमाण के तौर पर पेश किए जा रहे हैं। यह पुष्टि नहीं हुई है कि जूनियर छात्रों ने अपनी मर्जी से हस्ताक्षर किए या उन पर दबाव बनाया गया। शिकायतकर्ताओं की पहचान जानने की कोशिश कॉलेज में रैगिंग की शिकायत करने वाले विद्यार्थियों की पहचान गोपनीय रखी गई है। आरोप है कि वर्ष 2024 और 2025 बैच के कुछ छात्र उन जूनियर विद्यार्थियों की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं, जिन्होंने एनएमसी को ई-मेल भेजकर रैगिंग की शिकायत की थी। ऐसे में कॉलेज प्रशासन के सामने शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की चुनौती है। शिकायतकर्ताओं पर किसी तरह का दबाव न बने, इसके लिए भी जरूरी कदम उठाने होंगे। प्राचार्य बोलीं- एनएमसी को देंगे पूरी जानकारी वहीं, इस संबंध में पीएमसीएच की प्राचार्य प्रो. गीता सिन्हा ने बताया कि सूचना मिली है कि निलंबित होने के बावजूद छात्र क्लास में आ रहे हैं। शिक्षकों को उनकी हाजिरी नहीं बनाने का निर्देश दिया गया है। इस पूरे मामले की जानकारी राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) को भी दी जाएगी।
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