
Trisha Krishnan: दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में मंगलवार, 4 अगस्त को हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जब अचानक से तमिलनाडु पुलिस ने DMK नेता उदयनिधि स्टालिन को हिरासत में ले लिया। उन पर अभिनेत्री तृषा और सीएम विजय के बारे में कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप में FIR दर्ज की गई थी।
इस मामले में अब मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु पुलिस को निर्देश दिया कि वे DMK विधायक और विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन से अभिनेत्री तृषा से जुड़ी कथित टिप्पणियों के मामले में पूछताछ पूरी करने के बाद उन्हें रिहा कर दें। कोर्ट ने स्टालिन को यह भी निर्देश दिया कि जब भी जरूरत हो, वे जांच में सहयोग करें।
अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप में FIR दर्ज
उदयनिधि स्टालिन द्वारा अभिनेत्री तृषा और सीएम विजय पर अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप में उन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 61, 79, 192, 196, 296(b), 351(2) और 352, तमिलनाडु महिला उत्पीड़न निषेध अधिनियम की धारा 4 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया गया।
स्टालिन का आरोप, ‘झूठी कहानी’ बनाई गई
हिरासत में लिए जाने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उदयनिधि ने कोई भी अपमानजनक टिप्पणी करने से इनकार किया और आरोप लगाया कि उनके भाषण के एडिट किए गए क्लिप फैलाकर एक “झूठी कहानी” बनाई गई है।
उन्होंने कहा ‘उन्होंने ‘कट, कॉपी, पेस्ट’ का इस्तेमाल करके झूठी खबरें फैलाई और दावा किया कि मैंने कुछ ऐसा कहा जो मैंने कभी कहा ही नहीं। मैं ऐसा व्यक्ति नहीं हूं जो इन सब से डर जाए। मैं कानूनी तौर पर इसका सामना करूंगा। उन्होंने अपने खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को “कॉमेडी” बताया।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब कावेरी विरोध प्रदर्शन के दौरान एक सभा को संबोधित करते हुए उदयनिधि की बात को भीड़ के कुछ हिस्सों ने “तृषा, तृषा” के नारे लगाकर बीच में ही रोक दिया। कथित तौर पर उन्होंने जवाब दिया, ‘पानी कहीं और पहुंचे या न पहुंचे, उसे वहां पहुंचना चाहिए,’ और बाद में स्पष्ट किया कि वह कावेरी के पानी की बात कर रहे थे।
इन टिप्पणियों के बाद, तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) की महिला शाखा ने तंजावुर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया कि DMK नेता ने अभिनेत्री तृषा को निशाना बनाते हुए दोहरे अर्थ वाली टिप्पणी की थी। हालांकि, DMK का कहना है कि उदयनिधि की टिप्पणियों को गलत तरीके से पेश किया गया और वे सरकार के कामकाज पर केंद्रित थीं, न कि किसी व्यक्ति पर।