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अररिया सदर अस्पताल परिसर में शनिवार को विश्व तम्बाकू निषेध दिवस पर एक व्यापक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस वर्ष की थीम “तम्बाकू और निकोटीन की लत का मुकाबला करने की अपील को उजागर करें” के तहत लोगों को तम्बाकू एवं निकोटीन उत्पादों के गंभीर दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया गया। कार्यक्रम में अधिकारी रहे मौजूद कार्यक्रम में सिविल सर्जन डॉ. केके कश्यप, गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. जमील अहमद, जिला कार्यक्रम प्रबंधक संतोष कुमार, डीपीसी राकेश कुमार, कैंसर स्क्रीनिंग टीम की डॉ. साइना एवं डॉ. मैत्रेयी, पिरामल फाउंडेशन के प्रोग्राम मैनेजर संजय कुमार झा और राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम के मनोवैज्ञानिक शुभम कुमार सहित कई स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि तम्बाकू का सेवन कैंसर, हृदय रोग, स्ट्रोक, फेफड़ों की बीमारियों और मुंह के कैंसर का प्रमुख कारण है। उन्होंने इसके सेवन से होने वाले विभिन्न स्वास्थ्य जोखिमों पर प्रकाश डाला। युवा पीढ़ी में ई-सिगरेट का चलन बढ़ा सिविल सर्जन डॉ. केके कश्यप ने कहा, “तम्बाकू न सिर्फ व्यक्ति को बल्कि पूरे परिवार को प्रभावित करता है। युवा पीढ़ी में ई-सिगरेट और निकोटीन युक्त वेब पाउच के बढ़ते उपयोग को देखते हुए हमें अब और अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है।” कार्यक्रम के दौरान एक जागरूकता रैली भी निकाली गई, जिसमें स्वास्थ्यकर्मियों और स्थानीय नागरिकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। रैली के बाद अस्पताल परिसर में शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया। प्रतिभागियों ने सामूहिक रूप से तम्बाकू मुक्त जीवन अपनाने, परिवार एवं समाज को इसके दुष्प्रभावों से अवगत कराने और युवाओं को नशे की लत से दूर रखने का संकल्प लिया। लंबे समय में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं मनोवैज्ञानिक शुभम कुमार ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि ई-सिगरेट को सुरक्षित विकल्प समझना एक बड़ी भूल है। यह भी निकोटीन की लत का कारण बनता है और लंबे समय में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा करता है। जिला स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर तम्बाकू नियंत्रण को मजबूत करना और लोगों में स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना है। उपस्थित नागरिकों ने सरकार की तम्बाकू नियंत्रण नीतियों का समर्थन करते हुए ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों को नियमित रूप से आयोजित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
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