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शरफा बानो मरहुमा के पुत्र मो. सिकंदर की रिपोर्ट
पोस्टमार्टम और इंज्युरी रिपोर्ट लिखने में अब डॉक्टरों की मनमानी नहीं चलेगी। 24 से 48 घंटे के भीतर रिपोर्ट लिखकर मेडलिप आर (मेडिको लीगल एग्जामिनेशन एंड पोस्टमार्टम रिपोर्टिंग) पर अपलोड करनी होगी। अब हाथ से नहीं लिखनी होगी। देर से रिपोर्ट लिखने पर डॉक्टरों को शोकॉज किया जाएगा। बिहार में 1380 में से 1308 थानों में दर्ज संगीन अपराध के मामले में डॉक्टर इसी एप पर रिपोर्ट डाल रहे हैं। रिपोर्ट डालते ही क्राइम एंड क्रिमिनिल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम पोर्टल पर ऑनलाइन हो जा रही है। बचे 72 थानों को भी इससे जोड़ने का काम तेजी से चल रहा है। इन थानों में भी दो-चार माह में जोड़ दिया जाएगा। नए कानून में इसी एप पर रिपोर्ट डालना अनिवार्य किया गया है। चंडीगढ़, यूपी, गुजरात, राजस्थान, असम और हरियाणा के बाद बिहार देश का सातवां राज्य है, जहां यह लागू हो गया है। पीएमसीएच, एनएमसीएच, आईजीआईएमएस समेत बिहार के सभी मेडिकल कॉलेजों समेत 646 अस्पतालों को जोड़ा गया है। इन अस्पतालों के 16615 डॉक्टरों को मेडलिप आर एप का लॉगइन और यूजर आईडी दिया गया है। बिहार के 1380 थानों में से 1308 जुड़े, बाकी को जोड़ा जा रहा रिपोर्ट ऑनलाइन होने के फायदे हाथ से लिखी रिपोर्ट पढ़ने में दिक्कत होती थी, जिससे जांच में देरी होती थी। डिजिटल रिपोर्ट स्पष्ट और पढ़ने योग्य होती है। इस एप में शरीर के अंगों पर चोट के निशानों को ग्राफिक्स या चित्रों के जरिए चिह्नित करने की सुविधा है, जिससे पुलिस को अपराध की प्रकृति समझने में सुविधा होती है। रिपोर्ट में कोई भी बदलाव करना नामुमकिन होगा। इसमें हर बदलाव का ऑडिट ट्रेल (लॉग) दर्ज होता है। स्पष्ट और पठनीय डिजिटल साक्ष्य मिलने से मुकदमों का फैसला जल्दी होगा। जानिए मेडलिप आर के बारे में यह ई-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म और मोबाइल एप्लिकेशन है, जिसे मेडिको-लीगल केस और पोस्टमार्टम रिपोर्ट को डिजिटल बनाने के लिए विकसित किया गया है। इसे एनआईसी ने तैयार किया है। नए कानून के लागू होने के बाद बिहार समेत देशभर में लागू किया गया है। डीजीपी विनय कुमार ने बताया कि इस एप में पोस्टमार्टम रिपोर्ट ऑनलाइन करने के लिए डॉक्टरों को ट्रेनिंग दी गई है। साथ ही पुलिस को भी ट्रेनिंग दे गई है, वे कैसे रिपोर्ट को देख सकेंगे। बिहार में सीसीटीएनएस के वर्जन 2.0 पर काम तेजी से चल रहा है। डॉक्टरों को 48 घंटे में रिपोर्ट ऑनलाइन कर देनी है। सीसीटीएनएस पर रिपोर्ट ऑनलाइन होने पर अभियोजन, कोर्ट, पुलिस या कोई भी कभी भी देख सकता है, जिसे इसका लॉगइन और आईडी दिया गया है।
रिपोर्ट में छेड़छाड़ नहीं हो सकेगी एक्सपर्ट रिपोर्ट ऑनलाइन होने से बेल की सुनवाई में तेजी आएगी। पहले रिपोर्ट समय पर नहीं आने से बेल की सुनवाई होने में देरी होती थी। कभी-कभार रिपोर्ट में छेड़छाड़ होती थी, जो अब नहीं होगी। केस के सुपरविजन में पारदर्शिता के साथ ही तेजी आएगी। मसलन-अगर एफआईआर में हत्या के प्रयास की धारा लग गई और इंज्युरी रिपोर्ट साधारण है तो हत्या के प्रयास की धारा सुपरविजन में हट जाएगी।
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