
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भोपाल के हाई प्रोफाइल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत मामले में बड़ी कार्यवाही करते हुए आरोपित सास और पूर्व जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द कर दी है। बुधवार को जबलपुर हाईकोर्ट में गिरिबाला की अग्रिम जमानत के खिलाफ लंबी बहस चली। लगभग पौने तीन घंटे तक चली बहस और दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, फिर देर शाम कोर्ट ने मामले पर अपना फैसला सुनाया।
कोर्ट ने पूर्व जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत खारिज कर दी। जस्टिस देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ ने बुधवार को लंबी सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट, व्हाट्सएप चैट, गवाहों के बयान और केस डायरी जैसे महत्वपूर्ण तथ्यों पर पर्याप्त विचार नहीं किया। कोर्ट ने माना कि मृतका के शरीर पर कई एंटीमॉर्टम चोटें थीं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका की खारिज
हाईकोर्ट ने ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह को 15 मई को भोपाल के 10वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश द्वारा दी गई अग्रिम जमानत रद्द कर दी है। यह जमानत BNS, 2023 की धारा 80(2), 85, 3(5) और दहेज निषेध अधिनियम, 1961 की धारा 3 और 4 के तहत दंडनीय अपराधों के लिए दी गई थी।
जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और CBI आरोप लगाया कि गिरिबाला सिंह ने जांच में सहयोग नहीं किया गया और नोटिसों के बावजूद बयान देने से बचती रहीं। कोर्ट के सामने यह भी कहा गया कि CCTV फुटेज के चयनित हिस्से मीडिया में लीक किए गए। हाईकोर्ट ने माना कि मामला बेहद गंभीर और संवेदनशील है तथा जांच अभी प्रारंभिक स्तर पर है।
कोर्ट ने कहा जल्दबाजी में दी गई राहत
अदालत ने कहा कि अग्रिम जमानत जैसे असाधारण राहत आदेश देते समय अधिक सावधानी जरूरी थी। सीबीआई को मामले में पक्षकार बनाते हुए कोर्ट ने 15 मई 2026 को पारित अग्रिम जमानत आदेश को रद्द कर दिया।