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अररिया सदर प्रखंड के झमटा-महिषाकोल इलाके में परमान नदी पर बने पुल का पाया धंसने के तीन दिन बाद शनिवार को उच्च स्तरीय जांच टीम मौके पर पहुंची। यह पुल चार साल पहले 7 करोड़ 32 लाख रुपये की लागत से बनाया गया था। टीम वैज्ञानिक तकनीक का उपयोग कर पुल की गुणवत्ता और निर्माण में हुई अनियमितताओं की जांच कर रही है। प्रकाश कंस्ट्रक्शन कंपनी ने बनाया था पुल यह पुल ग्रामीण कार्य विभाग की योजना के तहत प्रकाश कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा निर्मित किया गया था। जानकारी के अनुसार, पुल के स्लैब में धंसाव आ गया है और रेलिंग में दरारें पड़ गई हैं। स्थानीय लोगों की शिकायत के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ। जांच टीम में ब्रीज एक्सपर्ट अरुण मिश्रा, चीफ इंजीनियर दीप नारायण प्रसाद और पूर्णिया के अधीक्षण अभियंता रविंद्र कुमार सिंह शामिल हैं। टीम ने झमटा गांव पहुंचकर पुल के विभिन्न हिस्सों का निरीक्षण शुरू किया। विशेषज्ञ वैज्ञानिक उपकरणों से पुल की मजबूती, नींव की गहराई और सामग्री की गुणवत्ता की जांच कर रहे हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई पूर्णिया के अधीक्षण अभियंता रविंद्र कुमार सिंह ने बताया कि इस मामले में एक जांच टीम गठित की गई है। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जांच रिपोर्ट आने के बाद उच्च स्तरीय जांच समिति के गठन की संभावना है। सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी और दोषी पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार व अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुल का निर्माण गुणवत्ता पर ध्यान नहीं स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर काफी आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि पुल का निर्माण बेहद घटिया तरीके से किया गया और निरीक्षण के दौरान भी गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया। पुल के धंसने से आसपास के कई गांवों के लोगों को परमान नदी पार करने में परेशानी हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते पुल की मरम्मत नहीं की गई, तो पूरी संरचना खतरे में पड़ सकती है। यातायात के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही यह मामला बिहार में सरकारी योजनाओं में हो रही लापरवाही और घटिया निर्माण का एक और उदाहरण बन गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद विभाग इसकी मरम्मत या पुनर्निर्माण को लेकर फैसला लेगा। फिलहाल, यातायात के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है।
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