चतरा जिले के बरवाडीह टोला गांव में आज भी विकास की बुनियादी सुविधाएं लोगों के लिए सपना बनी हुई हैं। यहां के ग्रामीण रोजगार और शिक्षा जैसी मूलभूत जरूरतों के लिए जूझ रहे हैं। गांव की स्थिति यह दर्शाती है कि सरकारी योजनाएं अभी भी जमीनी स्तर तक प्रभावी तरीके से नहीं पहुंच पा रही हैं। इसका सबसे अधिक असर गांव के युवाओं और बच्चों पर पड़ रहा है।

गांव के अधिकांश युवा रोजगार के अभाव में दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। स्थानीय स्तर पर रोजगार के साधनों की भारी कमी है। न तो यहां कोई उद्योग-धंधा है और न ही स्वरोजगार के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार उन्होंने प्रशासन से रोजगार के अवसर बढ़ाने की मांग की, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। गांव के युवक राजू यादव बताते हैं कि परिवार का पालन-पोषण करने के लिए उन्हें हर साल दिल्ली या पंजाब जाना पड़ता है, जहां वे दिहाड़ी मजदूरी करते हैं।
शिक्षा की स्थिति भी गांव में काफी दयनीय है। बरवाडीह टोला में केवल एक प्राथमिक विद्यालय है, जहां शिक्षकों की उपस्थिति नियमित नहीं रहती। बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही है, जिससे उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है। माध्यमिक और उच्च विद्यालय गांव से कई किलोमीटर दूर स्थित हैं, जिससे बच्चों, खासकर लड़कियों को पढ़ाई जारी रखने में कठिनाई होती है। परिवहन की सुविधा न होने के कारण कई छात्राएं बीच में ही अपनी पढ़ाई छोड़ देती हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, गांव में सड़क, नाली और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं की भी कमी है। कच्ची सड़क होने के कारण बरसात के मौसम में गांव का संपर्क आसपास के क्षेत्रों से लगभग कट जाता है। जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने से गंदगी और जलभराव की समस्या बनी रहती है, जिससे बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। बिजली आपूर्ति भी अनियमित है, जिससे बच्चों की पढ़ाई और लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित होता है।
गांव के बुजुर्गों का कहना है कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही गांव की समस्याएं भूल जाते हैं। कई बार शिकायत करने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। ग्रामीण अब सरकार से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उनकी समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान दिया जाएगा।
बरवाडीह टोला गांव की यह स्थिति केवल एक गांव की कहानी नहीं है, बल्कि उन सैकड़ों गांवों की हकीकत है, जो आज भी विकास की मुख्यधारा से दूर हैं। अगर जल्द ही रोजगार और शिक्षा के क्षेत्र में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो गांव के युवाओं का भविष्य अंधकारमय होता जाएगा और पलायन की यह समस्या और भी गंभीर रूप ले सकती है।