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गोहत्या से बचें मुसलमान गाय को घोषित करें राष्ट्रीय पशु पशु वध पर सुवेंदु के एक्शन का असर नखोदा मस्जिद के इमाम ने…



Kolkata Nakhoda Mosque Imam on Cow Slaughter: कोलकाता की प्रसिद्ध नखोदा मस्जिद के इमाम ने मुसलमानों से अपील की है कि वे हिंदु समुदाय की भावनाओं का सम्मान करते हुए गाय की कुर्बानी देने से परहेज करें।

मौलाना मोहम्मद शफीक कासमी समाचार एजेंसी से बात करते हुए कहते हैं कि अगर सरकार जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा सकती, तो उसे गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करना चाहिए और गाय की हत्या और गोमांस निर्यात पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा देनी चाहिए।

बंगाल में गोहत्या पर नया नोटिस

पश्चिम बंगाल की सुवेंदु अधिकारी सरकार ने पिछले हफ्ते दिशानिर्देश जारी किए थे, जिसमें कहा गया कि बिना ‘फिटनेस सर्टिफिकेट’ के किसी भी मवेशी-भैंस की हत्या पूरी तरह से प्रतिबंध है। बंगाल सरकार के नियम के मुताबिक, फिटनेस सर्टिफिकेट केवल किसी नगरपालिका के अध्यक्ष, किसी पंचायत समिति के प्रमुख और एक सरकारी पशु चिकित्सक के साथ मिलकर ही जारी किया जाएगा।

बिना फिटनेस सर्टिफिकेट काटने पर लगी रोक

नियम के अनुसार, यह सर्टिफिकेट तभी जारी होगा जब अथॉरिटी सहमत होगी कि जानवर 14 साल से ज्यादा उम्र का है या फिर वह प्रजनन के लायक नहीं और बूढ़ा है। इसके अलावा वह चोटिल और अपंग है या लाइलाज बीमारी के कारण अक्षम है।

गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कर देना चाहिए- मौलाना

मौलाना कासिम कहते हैं कि सरकार को इन सभी चीजों की व्यवस्था करनी चाहिए। हर जगह बूचड़खाने बनाने चाहिए और हर बाजार में पशु चिकित्सक उपलब्ध कराने चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि अगर सरकार इन व्यवस्थाओं को करने में सक्षम नहीं है तो उसे गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कर देना चाहिए। साथ ही देशभर में गोहत्या और बूचड़खानों के संचालन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा देना चाहिए।

‘गाय की कुर्बानी देने से बचें मुसलमान’

मौलाना कासिम ने मुस्लिम समुदाय से कहा कि उन चीजों से परहेज करें जिससे दूसरे धर्म की भावनाओं को ठेस पहुंचती है। उन्होंने कहा कि हम मुस्लिम भाईयों से अपील करते हैं कि कृपया गाय की कुर्बानी देने से बचें, क्योंकि इससे हिंदू भाईयों की भावनाओं को ठेस पहुंचती है। उन्होंने इसके बजाय बकरियों की कुर्बानी देने का आग्रह किया।

‘ये कोई नया कानून नहीं…’

कासमी ने पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम का जिक्र करते हुए कहा कि यह कोई नया कानून नहीं है, बल्कि 1950 से लागू है, लेकिन अब इसे अधिक सख्ती से लागू किया जा रहा है। उनके मुताबिक, पिछली सरकारों ने मुसलमानों को कुछ छूट दी थी। लेकिन इसका स्थायी समाधान नहीं दिया गया। यह सरकार इस कानून को केवल सख्ती से लागू कर रही है।

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