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गृहमंत्री जी हंस रहे हैं पूरी योजना बना रखी है चाणक्य जिंदा होते तो चौंक जाते आपकी राजनीति देखकर प्रियंका गांधी को सुन…



Priyanka Gandhi Fun Interaction with Amit Shah in Lok Sabha: संसद के विशेष सत्र के दौरान गुरुवार को महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर चर्चा के बीच एक ऐसा पल आया, जब तीखी राजनीतिक बहस ठहाकों में बदल गई। महिला आरक्षण बिल पर अपनी बात रखते हुए प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बिल महिलाओं के सशक्तिकरण से ज्यादा चुनावों में लाभ लेने का एक ‘पॉलिटिकल ट्रंप कार्ड’ है। जब प्रियंका अपनी बात रख रही थीं, तो उन्होंने सामने बैठे अमित शाह की ओर देखा, जो उनकी बातों को सुनकर मंद-मंद मुस्कुरा रहे थे।

इस पर प्रियंका गांधी ने भी हंसते हुए कहा, “हंस रहे हैं… गृह मंत्री जी हंस रहे हैं। पूरी तैयारी बना रखी है आपने। आज चाणक्य अगर जिंदा होते तो वो भी चौंक जाते, आपकी कुटिलता की दाद देते।” प्रियंका का यह कहना था कि पूरा सदन ठहाकों से गूंज उठा। अमित शाह भी इस तंज का बुरा मानने के बजाय खुलकर हंसते नजर आए।

परिसीमन और सीटों की संख्या पर उठाए सवाल

हंसी-मजाक के बाद प्रियंका गांधी फिर से अपने आक्रामक तेवर में दिखीं। उन्होंने बिल की तकनीकी बारीकियों पर गंभीर सवाल भी किए। उन्होंने पूछा, यदि सरकार वास्तव में आरक्षण देना चाहती है, तो लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों में ही 33 प्रतिशत आरक्षण क्यों नहीं दिया जा रहा? 

उन्होंने विधेयक की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें राजनीति की बू आ रही है। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि परिसीमन के साथ इसे जोड़ना लोकतंत्र के लिए खतरा साबित हो सकता है। प्रियंका ने आरोप लगाया कि सरकार लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बनाकर अपनी योजनाएं थोप रही है।

नेहरू और राजीव गांधी का जिक्र कर घेरा

यही नहीं प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस भाषण का भी जवाब दिया जिसमें उन्होंने कांग्रेस पर महिला आरक्षण को लटकाने का आरोप लगाया था। प्रियंका ने महिला अधिकारों के इतिहास का संदर्भ देते हुए भाजपा पर तंज कसा। उन्होंने मोतीलाल नेहरू की एक रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि 1928 में नेहरू नाम के एक व्यक्ति ने रिपोर्ट तैयार की थी, जिसमें मौलिक अधिकारों और महिलाओं के अधिकारों की बात की गई थी। उन्होंने इस क्षण को थोड़ा मजाकिया बनाते हुए कहा, “घबराइए नहीं, ये वो नेहरू नहीं हैं जिनसे आप कतराते हैं, ये उनके पिता मोतीलाल नेहरू थे।”

 ‘वन वोट, वन वैल्यू’ कांग्रेस की देन

उन्होंने आगे सरदार वल्लभभाई पटेल की अध्यक्षता में हुए कराची अधिवेशन (1931) का जिक्र करते हुए कहा कि यहीं से ‘वन वोट, वन सिटिजन, वन वैल्यू’ का सिद्धांत आया, जिसे अमेरिका जैसे देशों को अपनाने में 150 साल लग गए।

इसके बाद प्रियंका ने गर्व से कहा कि पंचायतों और नगरपालिकाओं में 33% महिला आरक्षण का प्रावधान सबसे पहले उनके पिता राजीव गांधी की सरकार ने ही पेश किया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा से महिलाओं को राजनीतिक अधिकार देने की पक्षधर रही है, जबकि मौजूदा बिल में राजनीति की बू आ रही है। 

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