Newswahni

गर्दनीबाग अस्पताल में कचरे में पड़ी मिली लाखों की दवाइयां पीपी किट ग्लब्स और जरूरी मेडिकल सामग्री खराब होने की कगार पर सरकारी…




पटना के गर्दनीबाग अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। अस्पताल परिसर में लाखों रुपये की दवाइयां, पीपी किट्स, हैंड ग्लब्स, जिंक टैबलेट्स और ग्लूकोज टेस्ट स्ट्रिप्स जैसी जरूरी मेडिकल सामग्री बदहाल स्थिति में पड़ी मिली हैं। कई सामान खराब होने की कगार पर पहुंच चुके हैं। दैनिक भास्कर डिजिटल की टीम जब अस्पताल पहुंची तो वहां की तस्वीरें स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलती नजर आईं। अस्पताल के बरामदों, गलियारों और सीढ़ियों तक में दवाइयों और मेडिकल उपकरणों के कार्टन बिखरे पड़े थे। कई जगहों पर ये सामग्री कचरे के ढेर के बीच लावारिस हालत में मिली। खुले में पड़ी दवाओं पर जमी धूल अस्पताल में दवाओं के रखरखाव की स्थिति बेहद खराब दिखाई दी। कई कार्टन खुले में पड़े मिले, जिन पर धूल जमी हुई थी। नमी और गर्मी के बीच बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के रखी गई दवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार गलत तरीके से रखी गई दवाएं अपनी प्रभावशीलता खो सकती हैं, जिससे मरीजों के इलाज पर भी असर पड़ सकता है। गोदाम में रैक तक नहीं, जमीन पर रखी दवाइयां अस्पताल के स्टोर रूम में दवाइयां रखने के लिए पर्याप्त रैक तक उपलब्ध नहीं हैं। कई कार्टन सीधे जमीन पर रखे गए हैं। पीपी किट्स, ग्लब्स और अन्य जरूरी मेडिकल सामग्री भी खुले वातावरण में पड़ी मिलीं। स्वास्थ्य विभाग की इस लापरवाही ने सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और दवा प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर ऐसे समय में जब राज्य के कई सरकारी अस्पतालों में मरीजों को जरूरी दवाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। इंसुलिन और इंजेक्शन भी सामान्य तापमान में सबसे गंभीर मामला तापमान-संवेदनशील दवाइयों को लेकर सामने आया है। इंसुलिन, विशेष इंजेक्शन और कई महत्वपूर्ण एंटीबायोटिक्स को 2 से 8 डिग्री सेल्सियस तापमान में सुरक्षित रखना जरूरी होता है। लेकिन अस्पताल में पर्याप्त कोल्ड स्टोरेज और रेफ्रिजरेशन सिस्टम नहीं होने के कारण इन्हें सामान्य तापमान में रखा जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, तय तापमान में दवाएं नहीं रखने से उनकी रासायनिक संरचना प्रभावित हो सकती है, जिससे दवाइयां बेअसर होने का खतरा बढ़ जाता है। एक्सपायरी के करीब पहुंचीं कई दवाइयां कमजोर मॉनिटरिंग और स्टॉक मैनेजमेंट की कमी के कारण कई दवाइयां एक्सपायरी के करीब पहुंच चुकी हैं। अगर समय रहते इनका उपयोग नहीं हुआ तो सरकारी खजाने को लाखों रुपये का नुकसान हो सकता है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि खराब गुणवत्ता वाली दवाइयों के इस्तेमाल से मरीजों के इलाज पर असर पड़ सकता है और गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा हो सकते हैं। अव्यवस्थित भंडारण से दवाओं की गुणवत्ता पर खतरा स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि दवा भंडारण में लापरवाही सीधे मरीजों की सेहत पर असर डालती है। अस्पताल में जिस तरह से दवाइयों को रखा गया है, उससे उनकी गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका लगातार बनी हुई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, तापमान नियंत्रित नहीं रहने से दवाओं की क्षमता कम हो सकती है। इंसुलिन और कई एंटीबायोटिक्स निष्क्रिय हो सकती हैं। नमी और धूल के कारण दवाओं की रासायनिक स्थिरता प्रभावित होती है।
अव्यवस्था के कारण एक्सपायर्ड दवाओं के वितरण का खतरा बढ़ जाता है। मेडिकल उपकरणों की गुणवत्ता भी खराब हो सकती है। WHO के मानकों की खुली अनदेखी विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन के अनुसार दवाओं को साफ-सुथरे, सुरक्षित और तापमान नियंत्रित स्थानों पर रखा जाना चाहिए। इसके लिए पर्याप्त कोल्ड चेन सिस्टम, रैक व्यवस्था, नियमित स्टॉक ऑडिट, प्रशिक्षित स्टाफ और फायर सेफ्टी जैसी व्यवस्थाएं अनिवार्य मानी जाती हैं। गर्दनीबाग हॉस्पिटल में इन मानकों की खुलेआम अनदेखी होती दिख रही है। अस्पताल परिसर में दवाइयां जिस हालत में रखी गई हैं, वह सरकारी दवा प्रबंधन प्रणाली की गंभीर खामियों को उजागर करता है। स्टाफ की कमी और अव्यवस्था बनी बड़ी वजह अस्पताल में दवा प्रबंधन के लिए पर्याप्त स्टाफ नहीं है। सीमित कर्मचारियों पर अधिक जिम्मेदारी होने के कारण स्टॉक की नियमित निगरानी नहीं हो पा रही। कई बार दवाइयों की एंट्री और वितरण का रिकॉर्ड भी समय पर अपडेट नहीं होता हैं। सिविल सर्जन ने दिए जांच और कार्रवाई के निर्देश पटना के सिविल सर्जन डॉ. योगेन्द्र प्रसाद मंडल ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि इस तरह की लापरवाही किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की कोताही सामने आती है तो संबंधित लोगों पर कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य व्यवस्था पर खड़े हो रहे बड़े सवाल गर्दनीबाग हॉस्पिटल की यह तस्वीर राजधानी पटना की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। जब सरकारी अस्पतालों में मरीज दवा के लिए परेशान हों और दूसरी तरफ लाखों की दवाइयां बदइंतजामी की भेंट चढ़ रही हों, तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि आम लोगों की सेहत के साथ गंभीर खिलवाड़ है।

अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करता है।



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

🏠
Home
🎬
मनोरंजन
💰
धन
🌦️
मौसम
📢
Latest News
×
Scroll to Top