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मगध मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में लापरवाही की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने अस्पताल की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां इलाज के दौरान जान गंवाने वाले एक बुजुर्ग का शव भी सुरक्षित नहीं रह सका। पोस्टमॉर्टम हाउस के कर्मियों ने मृतक बिगन दास की जगह पर लावारिस पुरुष की बॉडी सौंप दी। यही नहीं हद तो तब हो गई, जब अस्पताल कर्मियों ने बताया कि बीगन दास के शव को लावारिस समझकर अंतिम संस्कार के लिए भेज दिया गया है। परिजनों के पहुंचने से पहले चिता जल चुकी थी। इसके बाद वे श्मशान घाट पहुंचे और जलती चिता से शव को बचाने की कोशिश की। हैरानी की बात यह भी पीड़ित परिवार मगध मेडिकल थाना व अस्पताल सुपरिटेंडेंट के दफ्तर दौड़ लगाता रहा पर कहीं कोई भी सुनवाई नहीं हुई। लेकिन जैसे इस मामले में जहानाबाद के मखदुमपुर के पूर्व विधायक सतीश दास को इस बात की भनक लगी तो उन्होंने तमाम आला अधिकारियों को घटना की सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने पीड़ित पक्ष से आवेदन देने की बात कही। घटना से जुड़ी 2 तस्वीरें… बकरियां चराने निकले थे, सड़क पर वाहन ने मारी टक्कर
मृतक के रिश्तेदार सुनील कुमार रफीगंज निवासी ने बताया कि गुरारू थाना क्षेत्र के बर्मा गांव निवासी करीब 60 वर्षीय बीगन दास हमारे मौसा लगते थे। उनकी कोई संतान नहीं है। शुक्रवार तड़के करीब 3:30 से 3:45 बजे घर से वे बकरियां चराने निकले थे। इसी दौरान सड़क किनारे एक अज्ञात चार पहिया वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी। हादसे के बाद चालक वाहन लेकर फरार हो गया। सड़क किनारे लहूलुहान हालत में पड़े बीगन पर राहगीरों की नजर पड़ी। उन्हें गुरारू पीएचसी ले जाया गया। प्राथमिक इलाज के बाद गंभीर हालत देखकर मगध मेडिकल रेफर किया गया। परिजन शाम करीब 7 बजे उन्हें लेकर मगध मेडिकल पहुंचे। भर्ती करने के करीब एक घंटे बाद रात 8 बजे उनकी मौत हो गई। रातभर शव की रखवाली, सुबह बदली मिली लाश
मृतक के रिश्तेदार सुनील कुमार ने बताया कि डॉक्टरों ने पोस्टमार्टम कराने की बात कही थी। कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव को मॉर्चरी में रखवा दिया गया। रात भर हम लोग अस्पताल में मॉर्चरी के पास ही सुबह होने का इंतजार करते रहे। परिजनों को भरोसा था कि सुबह पोस्टमार्टम के बाद वे अपने बुजुर्ग का शव लेकर घर जाएंगे। अगले दिन करीब 10 बजे डेड बॉडी को पोस्टमार्टम हाउस में अपने हाथों से जमा किया। 11 बजे पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी हुई। सुनील ने बताया कि जब शव लेने पहुंचे तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। अस्पताल कर्मियों ने बीगन दास की जगह एक दूसरी लाश उन्हें सौंप दी।शक होने पर परिजनों ने शव के चेहरे से कपड़ा हटाया। सामने अज्ञात व्यक्ति का शव पड़ा था। वह बीगन दास नहीं थे। आपकी बॉडी तो जल गई…’ सुनकर दौड़ पड़े परिजन
परिजनों ने अस्पताल कर्मियों से बीगन दास के शव के बारे में पूछा। आरोप है कि इसके बाद उन्हें बताया गया कि उनकी बॉडी तो अंतिम संस्कार के लिए चली गई है और उसे जला दिया गया है। यह सुनते ही परिवार में हड़कंप मच गया। जिस शव की रातभर रखवाली की गई थी, वही शव अब कहां है, किसी को पता नहीं था। परिजन अस्पताल से निजी गाड़ी लेकर आननफानन में सीधे विष्णुपद स्थित श्मशान घाट की ओर भागे। वहां पहुंचने पर देखा कि चिता जल रही थी। परिजनों ने किसी तरह आग बुझाई और शव को बचाने की कोशिश की। परिवार के लिए यह पल कितना भयावह रहा होगा, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिस व्यक्ति को सम्मान के साथ अंतिम विदाई देने की तैयारी थी, उसी के शव की पहचान बचाने के लिए उन्हें जलती चिता तक दौड़ना पड़ा। मृतक के परिजनों ने शव को कब्जे में लेकर आगे की तैयारी में जुटे हैं। गरीब परिवार, संतान भी नहीं; अब कार्रवाई की मांग
रिश्तेदार सुनील कुमार ने बताया कि बीगन दास का कोई अपना बच्चा नहीं था। परिवार बेहद गरीब है। हादसे में मौत के बाद रिश्तेदार और ग्रामीण ही उनके अंतिम संस्कार की तैयारी में जुटे थे। अब शव बदलने और अंतिम संस्कार किए जाने की घटना से सभी आक्रोशित हैं।
परिजनों ने मगध मेडिकल थाना में भी शिकायत की। उनका आरोप है कि शिकायत के बाद भी तत्काल ठोस कार्रवाई नहीं हुई। प्रिंसिपल बोलीं- कर्मचारियों ने गलती स्वीकार की, जांच होगी
मगध मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल लता द्विवेदी ने बताया कि मामले की सूचना मिली है। अस्पताल के कर्मचारियों ने अपनी गलती स्वीकार की है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि लावारिस शव को लाने और अंतिम संस्कार के लिए ले जाने की जिम्मेदारी पुलिस की होती है। पुलिस को यह देखना चाहिए था कि वही शव ले जाया जा रहा है, जिसे लाया गया था।
उन्होंने कहा कि किसने शव ले जाया और किसने अंतिम संस्कार किया, पोस्टमार्टम से जुड़े कर्मियों से कहां चूक हुई, यह जांच का विषय है। प्रिंसिपल के अनुसार वे फिलहाल बाहर हैं। सोमवार को लौटने के बाद मामले में जांच बैठाकर आगे की कार्रवाई की जाएगी। ‘सवाल सिर्फ एक शव का नहीं, व्यवस्था का है’
पूर्व विधायक सतीश दास ने बताया कि बीगन दास के मामले ने मगध मेडिकल की शव प्रबंधन व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर शवों की पहचान के लिए सही टैगिंग और रिकॉर्ड मौजूद था, तो शव बदला कैसे? अगर पहचान की कोई व्यवस्था थी, तो लावारिस शव को परिजनों के शव की जगह कैसे सौंप दिया गया। और सबसे बड़ा सवाल- जिस शव के परिजन अस्पताल में मौजूद थे, उसे उनकी जानकारी के बिना अंतिम संस्कार के लिए भेजने की नौबत कैसे आई। उन्होंने कहा कि मौत के बाद परिवार अपने व्यक्ति को आखिरी बार देखना चाहता है। अंतिम विदाई उसका आखिरी अधिकार होती है। यहां सवाल सिर्फ अस्पताल की एक गलती का नहीं है। सवाल यह है कि क्या सरकारी अस्पताल में किसी गरीब परिवार के मृतक के शव की भी पहचान और सम्मान सुरक्षित नहीं है। यह गम्भीर व शर्मनाक मामला है।
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