Newswahni

खगड़िया में मछली उत्पादन गुना बढ़ाने की तैयारी ने बनाया फाइव फोल्ड फिश मिशन नदियों तालाबों का होगा इस्तेमाल…




खगड़िया। नदियों, चौर, तालाब, जलकर और आर्द्रभूमि से समृद्ध खगड़िया जिले में उपलब्ध जलीय संसाधनों का वैज्ञानिक और व्यवस्थित तरीके से उपयोग कर मत्स्य उत्पादन बढ़ाने की तैयारी शुरू हो गई है। जिलाधिकारी विक्रम विरकर ने जिले में मत्स्य उत्पादन को नई ऊंचाई देने के लिए ‘खगड़िया जिला समेकित मत्स्य विकास-सह-फाइव फोल्ड फिश मिशन’ की परिकल्पना की है। इस मिशन के तहत पारंपरिक मत्स्यपालन को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धतियों से जोड़कर जिले में मछली उत्पादन को मौजूदा स्तर से करीब पांच गुना बढ़ाने का लक्ष्य प्रस्तावित किया गया है। जिलाधिकारी की ओर से इस संबंध में डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सचिव को प्रस्ताव भेजा गया है। प्रस्ताव में खगड़िया के प्राकृतिक और कृत्रिम जल संसाधनों का समेकित सर्वेक्षण कर उन्हें मत्स्य विकास की योजनाओं से जोड़ने की दिशा में कार्य करने की बात कही गई है। साथ ही जिले को एक उपयुक्त मत्स्य क्लस्टर के रूप में विकसित करने के लिए विशेषज्ञ संस्थाओं की मदद से विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार कराने का अनुरोध किया गया है। जिले के हर जल संसाधन का तैयार होगा डाटा फाइव फोल्ड फिश मिशन के तहत जिले में उपलब्ध सरकारी और निजी जलकर, तालाब, चौर, नदियां, धाराएं तथा प्राकृतिक जलजमाव वाले क्षेत्रों का समेकित डाटा तैयार करने की योजना है। इसके जरिए जिले के अलग-अलग हिस्सों में उपलब्ध जल संसाधनों की स्थिति, क्षेत्रफल और मत्स्यपालन की संभावनाओं की पहचान की जा सकेगी। इस डाटा के आधार पर क्षेत्रवार मत्स्य विकास की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। जहां जिस प्रकार के जल संसाधन उपलब्ध हैं, वहां उसी के अनुरूप मत्स्यपालन की संभावनाओं का आकलन किया जाएगा। इससे जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के साथ मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान भी हो सकेगी। पारंपरिक मत्स्यपालन के साथ आधुनिक तकनीक पर जोर प्रस्तावित मिशन का उद्देश्य केवल जल संसाधनों की पहचान तक सीमित नहीं है। पारंपरिक मत्स्यपालन को आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़ने पर भी जोर दिया गया है। उपलब्ध संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन के साथ उत्पादन बढ़ाने वाली तकनीकों को अपनाने की दिशा में कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इससे वर्तमान में मत्स्यपालन कर रहे लोगों को बेहतर तकनीकी सहायता और संसाधन उपलब्ध कराने के साथ नए क्षेत्रों को भी मत्स्य उत्पादन से जोड़ने का रास्ता तैयार हो सकता है। विशेषज्ञ संस्थाओं की मदद से तैयार होगा डीपीआर जिला प्रशासन ने प्रस्तावित परियोजना का विस्तृत खाका तैयार करने के लिए राज्य स्तर की तकनीकी विशेषज्ञ एजेंसी, विभागीय तकनीकी दल और मत्स्य क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली शीर्ष संस्थाओं की सहायता लेने का अनुरोध किया है। इसके साथ ही भारत सरकार के मत्स्यपालन विभाग और राष्ट्रीय मत्स्यिकी विकास बोर्ड से भी तकनीकी सहयोग लेने का प्रस्ताव दिया गया है। विशेषज्ञ संस्थाओं की मदद से तैयार होने वाले डीपीआर में परियोजना का तकनीकी, सामाजिक और आर्थिक मूल्यांकन किया जाएगा। स्वीकृति और वित्त पोषण के लिए आगे होगी कार्रवाई डीपीआर में जिले के जल संसाधनों, मत्स्य उत्पादन की संभावनाओं, प्रस्तावित गतिविधियों, आवश्यक तकनीकी संसाधनों और परियोजना की आर्थिक व्यवहार्यता का अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद परियोजना की स्वीकृति और वित्त पोषण के लिए आगे की कार्रवाई का प्रस्ताव है। यदि योजना को स्वीकृति मिलती है तो खगड़िया के व्यापक जलीय संसाधनों को एक समेकित योजना के तहत मत्स्य क्षेत्र के विकास से जोड़ा जा सकेगा। इससे उत्पादन बढ़ाने के साथ मत्स्यपालकों की आय में वृद्धि और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने की संभावना भी बनेगी। खगड़िया को मत्स्य क्लस्टर के रूप में विकसित करने की दिशा खगड़िया की भौगोलिक स्थिति और बड़ी संख्या में उपलब्ध नदियों, चौरों, तालाबों, जलकरों और अन्य जल संसाधनों को देखते हुए जिला प्रशासन इन संसाधनों को व्यवस्थित रूप से मत्स्य क्षेत्र के विकास से जोड़ने की तैयारी कर रहा है। फाइव फोल्ड फिश मिशन के जरिए लक्ष्य यह है कि उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर सर्वेक्षण और प्रबंधन हो, क्षेत्रवार मत्स्यपालन की संभावनाओं की पहचान की जाए और आधुनिक तकनीक के माध्यम से उत्पादन क्षमता बढ़ाई जाए। प्रस्ताव आगे बढ़ने पर जिले को एक संगठित मत्स्य क्लस्टर के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा सकेगा।



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

🏠
Home
🎬
मनोरंजन
💰
धन
🌦️
मौसम
📢
Latest News
×
Scroll to Top