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केजरीवाल को बड़ा झटका राघव चड्ढा समेत के सांसदों के विलय को मंजूरी राज्यसभा में बढ़ी की ताकत…



Rajya sabha news: आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। राज्यसभा में राघव चड्ढा, स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह समेत AAP के सातों सांसदों के BJP में विलय को मंजूरी मिल गई है। राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने यह मंजूरी दी। इसके बाद जहां उच्च सदन में आम आदमी पार्टी के केवल तीन सांसद ही बचे हैं। तो वहीं बीजेपी की ताकत बढ़ गई है। 

राज्यसभा ने नोटिफिकेशन जारी किया है जिसमें BJP सांसदों की लिस्ट में इन 7 नेताओं के नाम भी शामिल हैं। राज्यसभा में BJP के सांसदों की संख्या बढ़कर 113 हो गई है, जो पहले 106 थी। वहीं, AAP सांसदों की संख्या 10 से घटकर तीन पर आ गई है। इनमें एक सांसद बलबीर सिंह सीचेवाल पंजाब से हैं, जबकि दो सदस्य संजय सिंह और नारायण दास गुप्ता दिल्ली से आते हैं।

7 सांसदों ने दिया केजरीवाल को झटका

शुक्रवार (24 अप्रैल) को AAP को तब बड़ा झटका लगा था, जब राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में जाने का ऐलान किया था। उन्होंने बताया था कि उनके साथ अशोक मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, विक्रमजीत साहनी, स्वाति मालीवाल और राजिंदर गुप्ता के भी पार्टी को अलविदा कह रहे हैं। इससे पहले AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा के उपनेता के पद से हटा दिया था। हैरानी की बात ये रही कि उनकी जगह पार्टी ने जिन अशोक मित्तल को इस पद की जिम्मेदारी सौंपी, उन्होंने भी राघव के साथ AAP छोड़ दी।  

AAP से बगावत करने वाले इन सातों सांसदों की सदस्यता को लेकर सवाल खड़े हो रहे थे। आम आदमी पार्टी ने बागी सांसदों के खिलाफ राज्यसभा के सभापति को एक याचिका भी दी थी, जिसमें उनकी सदस्यता खत्म करने की मांग की गई। पार्टी का कहना था कि ये सांसद अब पार्टी के साथ नहीं हैं, इसलिए उनकी राज्यसभा सदस्यता भी जारी नहीं रहनी चाहिए। पार्टी छोड़ने के बाद भी ये सांसद अपनी सीट पर बने हुए हैं, जो नियमों के खिलाफ है।

राघव चड्ढा ने बताया- क्यों छोड़ी AAP?

इससे पहले सोमवार (26 अप्रैल) को राघव चड्ढा ने एक वीडियो भी जारी की, जिसमें उन्होंने AAP छोड़ने के कारण गिनाए। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी अब पुरानी वाली पार्टी नहीं रही। आज इस पार्टी में काम करने का जहरीला माहौल बन गया था। आपको काम करने से रोका जाता है, संसद में बोलने से रोका जाता है। ये पार्टी आज चंद करप्ट और compromised लोगों के हाथ में फंसकर रह गई है, जो अब देश के लिए नहीं अपने निजी फायदे के लिए काम करते हैं।



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