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औरंगाबाद सदर अस्पताल में कार्यरत ममता कर्मी निर्मला देवी (41) की मौत हो गई। गुरुवार को उनका शव औरंगाबाद पहुंचते ही परिजन उसे लेकर सदर अस्पताल पहुंचे और मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग की। मृतका की पहचान नगर थाना क्षेत्र के कामा बिगहा निवासी सीताराम रविदास की पत्नी के रूप में हुई है। जो गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पताल में सुरक्षित प्रसव के लिए प्रेरित करने और स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने का कार्य करती थीं। बताया गया कि कुछ दिनों से उनकी तबीयत खराब चल रही थी। हृदय संबंधी बीमारी के कारण परिजन उन्हें 6 जून को बेहतर इलाज के लिए गुजरात के अहमदाबाद ले गए थे। वहां इलाज के दौरान 9 जून को उनकी मौत हो गई। मदद का मिला आश्वासन परिजनों के साथ पहुंचे वार्ड पार्षद धर्मेंद्र पासवान ने कहा कि आशा और ममता कर्मी बहुत कम मानदेय पर स्वास्थ्य विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाती हैं। वे गांव-गांव जाकर गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पताल में प्रसव कराने के लिए जागरूक करती हैं, लेकिन उन्हें पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पाती। उन्होंने मृतका के परिवार को उचित मुआवजा देने और उनकी बहू को ममता कर्मी के रूप में बहाल करने की मांग की। सूचना मिलने पर सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. आशुतोष कुमार अस्पताल पहुंचे और परिजनों से बातचीत कर उन्हें शांत कराया। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार की ओर से निर्धारित प्रावधानों के तहत जो भी सुविधाएं और सहायता उपलब्ध होंगी, उन्हें दिलाने का प्रयास किया जाएगा। दो बच्चों की शादी अभी नहीं हुई मृतका के बड़े बेटे सोनू कुमार ने बताया कि मां ही परिवार के भरण-पोषण का मुख्य आधार थी। मां की जगह परिवार की किसी महिला सदस्य को रोजगार दिया जाए, ताकि परिवार की आर्थिक स्थिति संभल सके। निर्मला देवी अपने पीछे दो बेटे और दो बेटियों को छोड़ गई हैं। इनमें एक बेटे और एक बेटी की शादी हो चुकी है, जबकि दो बच्चों की शादी अभी बाकी है।
स्वास्थ्य कर्मियों में रखा 2 मिनट का मौन इधर, घटना के बाद सदर अस्पताल के चिकित्सकों और कर्मियों ने 2 मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। अस्पताल प्रबंधक प्रफुल्ल कांत निराला ने कहा कि निर्मला देवी एक मेहनती और कर्तव्यनिष्ठ ममता कर्मी थीं। स्वास्थ्य विभाग के सभी कर्मियों की संवेदनाएं उनके परिवार के साथ हैं।
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