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औरंगाबाद में सांप काटने से एक महिला की मौत हो गई। मृतका की पहचान मोर डिहरी निवासी कमलेश राम की पत्नी संगीता देवी(30) के तौर पर हुई है। पिछले छह माह(जून) से अपने मायके तमौरी में रह रही थी। घटना जम्होर थाना क्षेत्र की है। परिजनों के अनुसार सोमवार रात खाना खाने के बाद संगीता अपनी मां मनमतिया कुंवर के साथ बेड पर सो रही थी। देर रात एक विषैले सांप ने उसे डंस लिया। जैसे ही किसी जहरीले जीव के काटने का एहसास हुआ, उसने शोर मचाकर परिजनों को जगाया। शोर सुनकर परिजन मौके पर पहुंचे। बेड पर विषैला सांप दिखाई दिया। थोड़ी ही देर तबीयत बिगड़ने लगी। झाड़-फूंक के चक्कर में गई जान गंभीर होने के बावजूद परिजन उसे तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय गांव के एक तांत्रिक के पास झाड़-फूंक के लिए ले गए। पूरी रात वहां झाड़-फूंक का सिलसिला चलता रहा, लेकिन उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई। इसके बाद परिजन उसे बारुण थाना क्षेत्र के चुरा गांव स्थित दूसरे तांत्रिक के पास ले गए, जहां भी काफी देर तक झाड़-फूंक कराई गई। जब किसी तरह का सुधार नहीं हुआ, तब मंगलवार को उसे सदर अस्पताल लाया गया। अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद परिजनों में कोहराम मच गया। सूचना मिलने पर पुलिस सदर अस्पताल पहुंची। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी। जानकारी मिलने के बाद मृतका के पति भी अस्पताल पहुंचे। छह महीने से मायके में थी मृतका के भाई अजीत कुमार ने बताया कि संगीता की शादी करीब 15 वर्ष पहले हुई थी। उसके 12 वर्ष का एक बेटा है। परिवार मजदूरी कर अपना भरण-पोषण करता है। मेरे बहन पिछले छह महीने से अपने मायके में रह रही थी। समय पर इलाज मिलता तो बच सकती थी जान वहीं, सदर अस्पताल के डॉक्टरों ने लोगों से जागरूक होने की अपील की है। उन्होंने कहा सर्पदंश के मामलों में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। यदि महिला को सांप काटने के तुरंत बाद अस्पताल लाया जाता और समय पर एंटी-स्नेक वेनम सहित आवश्यक उपचार शुरू हो जाता, तो उसकी जान बचाई जा सकती थी। सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक या अंधविश्वास का सहारा लेने के बजाय तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचे। इलाज में हुई देरी कई बार जानलेवा साबित होती है।
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