
संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में सोमवार को विपक्षी दल के सांसद लगातार हंगामा करते रहे, जिससे सदन की कार्यवाही बाधित रहे। पीठासीन जगदंबिका पाल ने सदस्यों को समझाने की भरपूर कोशिश की, लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं हुआ। उन्होंने विपक्ष के सांसदों को यहां तक कहा कि सदन चलाने में डेढ़ करोड़ प्रति घंटा खर्च होता है, लेकिन
व्यवधान न रुकने पर सदन को मंगलवार सुबह 10 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
जगदंबिका पाल सांसदों से सदन चलाने की अपील करते रहे और जनता के पैसे की बर्बादी पर कड़ी तलाड़ लगाई। लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 3:05 बजे शुरू हुई, जहां नियम 377 के तहत अलग-अलग मामलों पर चर्चा होनी थी। हालांकि, विपक्षी सदस्यों ने स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को लेकर जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। जगदंबिका पाल, जो उस समय सदन की कमान संभाल रहे थे, उन्होंने सदस्यों को शांत करने के लिए कई बार अपील की।
पीठासीन जगदंबिका पाल ने लोकसभा की कार्यवाही में बाधा डाल रहे सदस्यों को समझाया। उन्होंने कहा- “सदन चलाने में डेढ़ करोड़ रुपये प्रति घंटा खर्च होता है। एक-एक मिनट का ढाई लाख रुपया खर्च होता है। एक दिन में 9 करोड़ खर्च होता है। अपका गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार एक दिन का 9 करोड़ बर्बाद कर रहा है, ये जनता का पैसा है। आप क्या चाहते हैं? आप चर्चा भी नहीं कर रहे और चाहते हैं कि स्पीकर यहां आएं भी नहीं। आप इसे राजनीतिक एजेंडा बनाना चाहते हैं।
स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव
इस घटना से पहले, लोकसभा स्पीकर के पद पर अविश्वास प्रस्ताव विपक्ष द्वारा लाया गया था, जो सोमवार पारित हो चुका है। विपक्ष के 118 सांसदों ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए थे। विपक्ष का दावा है कि स्पीकर सदन की निष्पक्षता बनाए रखने में विफल रहे हैं, जबकि सत्ताधारी पक्ष इसे राजनीतिक स्टंट बता रहा है। संसदीय कार्य मंत्री ने भी सदन के बाहर पत्रकारों से कहा कि विपक्ष बहस से भाग रहा है और हंगामा करके जनता का समय बर्बाद कर रहा है।