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आमस-दरभंगा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे बनने का काम चल रहा है। इसके निर्माण में 500 मजदूर जुटे हुए हैं। यह एक्सप्रेस-वे गयाजी के आमस से शुरू होकर दरभंगा तक जाएगी और अपने रास्ता में अरवल, जहानाबाद, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, गयाजी, औरंगाबाद और दरभंगा सहित कुल सात जिलों को जोड़ेगी। इसके बन जाने के बाद राजधानी और मिथिलांचल क्षेत्र के बीच की दूरी काफी कम हो जाएगी। फिलहाल, यहां भारी मशीनों से लगातार काम हो रहा है और सैकड़ों मजदूर अलग-अलग निर्माण गतिविधियों में जुटे हैं। स्ट्रक्चरल इंजीनियर बोले- फंड की कोई कमी नहीं स्ट्रक्चरल इंजीनियर रविंद्र कुमार ने बताया कि परियोजना पर युद्धस्तर पर काम जारी है। फंड की कोई कमी नहीं है। यह केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है और निर्माण काम तय समयसीमा के अनुसार लगातार चल रहा है। उनका कहना है कि निर्धारित समय के अंदर परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य है। निर्माण स्थल पर कार्यरत मजदूर मिथिलेश कुमार और फेब्रिकेशन फीटर रविंद्र कुमार ने भी बताया कि वे दिन-रात काम कर रहे हैं। उनके अनुसार परियोजना में सैकड़ों मजदूर लगे हुए हैं और काम कभी बंद नहीं हुआ। मजदूरों ने कहा कि मजदूरी के भुगतान में भी कोई समस्या नहीं है और जरूरत के अनुसार समय पर राशि मिल रही है। निर्माण कब पूरा होगा, इसकी जानकारी वरिष्ठ अधिकारी ही दे सकते हैं, लेकिन जब तक परियोजना पूरी नहीं हो जाती, वे लगातार काम करते रहेंगे। 189 किलोमीटर लंबा होगा एक्सप्रेस-वे परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार बिहार की पहली ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे परियोजना आमस-दरभंगा एक्सप्रेस-वे की कुल लंबाई करीब 189 किलोमीटर है। इसे चार पैकेज में विभाजित किया गया है। इनमें तीन पैकेज मेघा कंपनी और एक पैकेज रामकृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को आवंटित किया गया है। रामकृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन के हिस्से में सिल्लोड से रानीपुर हाईवे तक लगभग 42 किलोमीटर का निर्माण काम है। इस पैकेज में 118 बॉक्स टाइप स्ट्रक्चर, 35 पाइल टाइप स्ट्रक्चर और दो आरबी (रेलवे ब्रिज) संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। परियोजना में करीब 500 मजदूर और स्टाफ दिन-रात कार्यरत हैं। रात में भी निर्माण कार्य निर्बाध रूप से चलता रहे, इसके लिए पर्याप्त प्रकाश और सुरक्षा व्यवस्था की गई है। बिजली लाइनों को किया जा रहा भूमिगत परियोजना से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि समस्तीपुर में हाई टेंशन (एचटी) लाइन शिफ्टिंग का काम पूरा हो चुका है। दरभंगा में जहां-जहां निर्माण कार्य चल रहा है, वहां बड़ी विद्युत लाइनों को भूमिगत करने का काम भी किया जा रहा है, ताकि निर्माण में किसी प्रकार की बाधा न आए। आम लोगों को होगा बड़ा फायदा निर्माण एजेंसी के साइट इंचार्ज विकास कुमार का कहना है कि एक्सप्रेस-वे बनने के बाद आमस से दरभंगा के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। यातायात अधिक सुरक्षित और सुगम होगा, जबकि व्यापार, परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। इससे मिथिलांचल सहित दक्षिण और उत्तर बिहार के बीच बेहतर सड़क संपर्क स्थापित होगा। इस परियोजना को ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे इसलिए कहा जा रहा है, क्योंकि इसका निर्माण नई भूमि और खेत-खलिहानों के बीच नए रास्ते के रूप में किया जा रहा है। यह किसी पुराने राष्ट्रीय या राज्य राजमार्ग के चौड़ीकरण पर आधारित नहीं है। केंद्र सरकार इसे बिहार की महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना परियोजनाओं में शामिल मान रही है। बता दें कि परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे दरभंगा एयरपोर्ट से भी जोड़ा जाएगा। इससे एयर कनेक्टिविटी और सड़क कनेक्टिविटी का संयुक्त फायदा मिलेगा और यात्रियों को राजधानी पटना जाने की आवश्यकता कम होगी।
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