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अलकतरा घोटाला मामले में कोर्ट का फैसला जूनियर इंजीनियर बरी ट्रांसपोर्टर दोषी करार साल की सजा और लाख जुर्माना…




लालू प्रसाद के शासनकाल के दौरान हुए 1997 के अलकतरा घोटाले से जुड़े एक मामले में सोमवार को पटना स्थित सीबीआई कोर्ट ने फैसला सुनाया। इस मामले में फैसला सीबीआई-2 के न्यायाधीश मोहम्मद रुस्तम ने सुनाया है। कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में तीन जूनियर इंजीनियर (जेई) को बरी कर दिया, जबकि एक ट्रांसपोर्टर को दोषी ठहराते हुए तीन वर्ष की सजा और 15 लाख रुपये जुर्माना लगाया। किन लोगों पर चल रहा था ट्रायल इस मामले में चार आरोपी ट्रायल फेस कर रहे थे। इनमें तीन जूनियर इंजीनियर और एक ट्रांसपोर्टर शामिल थे। जिसमें जयनारायण प्रसाद (जूनियर इंजीनियर), हामिद राज अंसारी (जूनियर इंजीनियर), एक अन्य जूनियर इंजीनियर, ट्रांसपोर्टर दूधेश्वर नाथ सिंह, ट्रायल के दौरान दो अन्य अभियुक्तों की मौत हो चुकी थी। क्या था मामला जयनारायण प्रसाद की ओर से 1997 से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता विनोद जी वर्मा के अनुसार, आरोप था कि 7 अगस्त 1994 के ऑर्डर संख्या 5501 के तहत 1000 मीट्रिक टन बिटुमन (अलकतरा) की आपूर्ति जहानाबाद डिवीजन में की जानी थी। इसके लिए हल्दिया से बरौनी होते हुए अलकतरा भेजा जाना था। मामले में 1053.92 मीट्रिक टन अलकतरा का उठाव किया गया था। आरोप था कि अलकतरा हल्दिया से उठाया तो गया, लेकिन उसे जहानाबाद नहीं भेजा गया और बीच में ही गड़बड़ी कर दी गई। कब दर्ज हुई थी एफआईआर मामले में एफआईआर 6 मार्च 1997 को दर्ज की गई थी। हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआई ने 20 फरवरी 1997 को मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। बाद में छह लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई। कोर्ट ने क्या कहा सीबीआई-2 पटना सिविल कोर्ट ने माना कि तीनों जूनियर इंजीनियरों के खिलाफ आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं। इसके चलते तीनों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया। वहीं ट्रांसपोर्टर दूधेश्वर नाथ सिंह को दोषी पाया गया। कोर्ट ने उन्हें तीन वर्ष की सजा सुनाई और 15 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।



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