Newswahni

बिल के विरोध में अधिवक्ता सड़क पर उतरेंगे गोपालगंज में बैठक कर रणनीति बनाई भविष्य से खिलवाड़ का आरोप…




गोपालगंज के व्यवहार न्यायालय परिसर में सोमवार को उस वक्त माहौल गरमा गया, जब अधिवक्ताओं ने यूजीसी के नए नियमों और प्रस्तावित संशोधनों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। स्थानीय व्यवहार न्यायालय परिसर में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में केंद्र सरकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के हालिया फैसलों पर अधिवक्ताओं ने कड़ा आक्रोश जताया। बैठक का नेतृत्व वरीय अधिवक्ता विमलेंदु दुबे ने किया, जिसमें बड़ी संख्या में अधिवक्ता शामिल हुए। बैठक के दौरान अधिवक्ताओं ने एक स्वर में यूजीसी द्वारा उच्च शिक्षण संस्थानों में किए जा रहे कथित हस्तक्षेप को शिक्षा व्यवस्था के लिए घातक बताया। अधिवक्ताओं का कहना था कि प्रस्तावित बिल और नए नियम न केवल शिक्षा की स्वायत्तता पर चोट करते हैं, बल्कि समाज के एक बड़े वर्ग के संवैधानिक अधिकारों का भी हनन करते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस बिल को अविलंब वापस नहीं लिया गया, तो अधिवक्ता चरणबद्ध आंदोलन के साथ-साथ उग्र आंदोलन करने और सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। शिक्षा व्यवस्था पर सीधा हमला बैठक को संबोधित करते हुए वरीय अधिवक्ता विमलेंदु दुबे ने कहा कि यूजीसी का यह प्रस्तावित बिल शिक्षा व्यवस्था पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा का उद्देश्य योग्यता, प्रतिभा और समान अवसर को बढ़ावा देना होना चाहिए, लेकिन यह बिल इसके ठीक विपरीत दिशा में जाता दिख रहा है।उन्होंने कहा, “हम कानून के जानकार हैं और यह भली-भांति समझते हैं कि यह बिल किस तरह एक विशेष वर्ग के मेधावी बच्चों के रास्ते में दीवार खड़ी कर रहा है। यह न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि असंवैधानिक भी है। इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।” सामान्य वर्ग के छात्रों के भविष्य पर संकट बैठक में शामिल अधिवक्ताओं का मुख्य आरोप था कि इस बिल के प्रावधान सामान्य वर्ग के बच्चों के शैक्षणिक भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं। अधिवक्ताओं का कहना है कि नए नियमों के कारण योग्यता और प्रतिभा की अनदेखी होगी और उच्च शिक्षा में प्रवेश के अवसर सीमित होते जाएंगे। इससे सामान्य वर्ग के छात्रों में निराशा बढ़ेगी और सामाजिक असंतुलन की स्थिति पैदा हो सकती है। अधिवक्ताओं ने आशंका जताई कि यदि इस तरह के नियम लागू हुए, तो समाज में भेदभाव और वैमनस्य बढ़ सकता है। शिक्षा, जो सामाजिक समरसता और समानता का माध्यम होनी चाहिए, वही विभाजन का कारण बन सकती है। चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति तय बैठक में रणनीतिक रूप से यह निर्णय लिया गया कि अधिवक्ता चरणबद्ध तरीके से विरोध प्रदर्शन करेंगे। आंदोलन की शुरुआत जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन से की जाएगी। इसके बाद राज्यपाल और संबंधित केंद्रीय मंत्रालय को ज्ञापन सौंपा जाएगा। यदि इसके बावजूद सरकार और यूजीसी ने अपना फैसला वापस नहीं लिया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह विरोध केवल गोपालगंज तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे राज्यव्यापी और राष्ट्रीय स्तर तक ले जाने की तैयारी की जाएगी। इसके लिए अन्य जिलों के अधिवक्ता संघों से भी संपर्क किया जाएगा। ‘काले कानून’ के खिलाफ निर्णायक लड़ाई अधिवक्ताओं ने कहा कि यह बैठक केवल औपचारिक विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक निर्णायक लड़ाई की शुरुआत है। उन्होंने यूजीसी के इस प्रस्तावित बिल को ‘काला कानून’ बताते हुए कहा कि इसका हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, “सरकार को युवाओं के भविष्य के साथ प्रयोग करने के बजाय शिक्षा में समानता, गुणवत्ता और अवसरों के विस्तार पर ध्यान देना चाहिए। शिक्षा को राजनीतिक और वैचारिक प्रयोगशाला नहीं बनाया जा सकता।” सामाजिक संगठनों से समर्थन की अपील गोपालगंज के अधिवक्ताओं ने जिले के अन्य सामाजिक संगठनों, शिक्षाविदों, छात्र संगठनों और अभिभावकों से भी इस आंदोलन में साथ आने की अपील की है। अधिवक्ताओं का कहना है कि यह मुद्दा केवल वकीलों या किसी एक वर्ग का नहीं, बल्कि पूरे समाज और आने वाली पीढ़ी के भविष्य से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इस बिल का विरोध नहीं किया गया, तो इसका दुष्प्रभाव लंबे समय तक देखने को मिलेगा। इसलिए सभी वर्गों को एकजुट होकर इसके खिलाफ आवाज बुलंद करनी चाहिए। सरकार को चेतावनी बैठक के अंत में अधिवक्ताओं ने केंद्र सरकार और यूजीसी को साफ चेतावनी दी कि यदि छात्रों और समाज के हितों की अनदेखी की गई, तो आंदोलन को और व्यापक तथा उग्र रूप दिया जाएगा। अधिवक्ताओं ने कहा कि वे लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करेंगे, लेकिन जरूरत पड़ी तो न्यायालयों का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा। कुल मिलाकर, गोपालगंज व्यवहार न्यायालय में हुई यह बैठक शिक्षा से जुड़े एक बड़े मुद्दे पर व्यापक आंदोलन की नींव रखती नजर आई। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार और यूजीसी इस विरोध को किस तरह लेती है और क्या अधिवक्ताओं की मांगों पर कोई ठोस पहल की जाती है या नहीं।



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

🏠
Home
🎬
मनोरंजन
💰
धन
🌦️
मौसम
📢
Latest News
×
Scroll to Top