
Sea Water Salty: धरती का लगभग 70% हिस्सा पानी से ढका हुआ है। विशाल महासागर दूर से देखने में शांत और नीले दिखाई देते हैं, लेकिन इनकी एक बूंद चखते ही जो कड़वाहट और खारापन महसूस होता है, वह हर किसी के मन में एक सवाल पैदा करता है कि आखिर इतना सारा नमक आया कहां से? क्या समुद्र शुरू से ही ऐसा था, या समय के साथ यह नमकीन होता गया?
आइए आपको इस लेख में विस्तार से बताते हैं कि समुद्र के खारे पानी होने के पीछे का कारण क्या है?
हवा और पानी का एसिडिक नेचर होना
समुद्र के खारेपन की कहानी आसमान से शुरू होती है। जब हवा में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड बारिश के पानी के साथ मिलती है, तो वह पानी को हल्का एसिडिक बना देती है। जब यह बारिश जमीन पर गिरती है, तो वह चट्टानों और पहाड़ों के संपर्क में आती है।
बारिश का यह एसिडिक पानी चट्टानों को धीरे-धीरे घिसता है और उनमें मौजूद खनिज और आयरन के रूप में अलग कर देता है। ये आयरन नदियों के माध्यम से बहते हुए समुद्र में जाकर मिल जाते हैं। जिससे समुद्र का पानी खारा हो जाता है।
समुद्र के भीतर हाइड्रोथर्मल वेंट्स होते हैं
खारेपन का दूसरा बड़ा कारण समुद्र की सतह के नीचे छिपा है। समुद्र के फर्श पर हाइड्रोथर्मल वेंट्स और समुद्री ज्वालामुखी होते हैं। जब समुद्र का पानी पृथ्वी की दरारों से होकर गर्म मैग्मा के संपर्क में आता है, तो वह फिर से समुद्र में लौटते समय अपने साथ भारी मात्रा में खनिज और आयरन लेकर आता है।
नदियां हर साल करोड़ों टन नमक समुद्र में डालती हैं, लेकिन समुद्र का पानी कम नहीं होता है। सूरज की गर्मी से समुद्र का पानी भाप बनकर उड़ता रहता है, पर नमक नीचे ही रह जाता है। हजारों-लाखों साल से चल रही इस प्रक्रिया ने समुद्र के पानी में नमक की कॉन्सन्ट्रेशन को बढ़ा दिया है।
समुद्र में भरपूर मात्रा में पाया जाता है सोडियम क्लोराइड
समुद्र के पानी में सबसे अधिक मात्रा सोडियम क्लोराइड की होती है, जिसे हम साधारण भाषा में ‘खाने वाला नमक’ कहते हैं।