
R. Bharat Sangam 2026: भारत की संस्कृति और कला का जश्न मनाने के लिए रिपब्लिक का मंच एक बार फिर सजकर तैयार है। देश का नंबर 1 न्यूज चैनल ‘रिपब्लिक भारत’ शुक्रवार, 16 दिसंबर को ‘संगम-साहित्य, सुर और शक्ति’ का आगाज हो चुका है। ‘संगम’ के मंच पर साहित्य, कला, संगीत, राजनीति, और मनोरंजन जगत के कई दिग्गज होंगे। वहीं इस आध्यात्मिक मंच पर कवि आलोक श्रीवास्तव आ चुके हैं। उन्होनें भगवान शिव के मंत्रों का साथ इस प्रोग्राम का आरंभ किया ।
आलोक श्रीवास्तव ने भगवान शिव की व्याख्या करते हुए कहा
‘शिव क्या हैं? वे शेष हैं, अशेष हैं, प्रशेष हैं, और विशेष हैं। जो उन्हें जैसा धारण कर ले, वे उसी के जैसा वेश हैं। उन्होंने आगे विस्तार से बताया कि शिव सनातन सभ्यता के एकमात्र ऐसे देवता हैं, जो अत्यंत सरल और सुलभ हैं। उन्होंने कहा कि महादेव को प्रसन्न करने के लिए किसी जटिल आडंबर की आवश्यकता नहीं है; यदि आप उन्हें पीपल के पेड़ के नीचे रख दें, तो वे ‘पीपलेश्वर’ हो जाते हैं और यदि आप श्रद्धा से एक लोटा जल और तीन पत्तियां भी अर्पित कर दें, तो वे आपके साथ हो लेते हैं।
आलोक श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में शिव तांडव स्तोत्र के सरल हिंदी अनुवाद की यात्रा को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि कैसे आज की युवा पीढ़ी महादेव के ‘महाकाल’ स्वरूप से जुड़ रही है। उनके अनुसार, शिव केवल विनाश के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे विलय, प्रलय और अकाल के साथ-साथ अत्यंत ‘तरल’ यानी कोमल भी हैं। उन्होंने अपनी पंक्तियों के माध्यम से शिव के विराट स्वरूप को कुछ इस तरह पिरोया।
‘वे नेत्र सूर्य देवता का, चंद्रमा का भाल हैं, विलय भी वे, प्रलय भी वे, अकाल-महाकाल हैं। उसी के नाथ हो लिए, जो उनके साथ हो लिया, वहीं के होकर रह गए, जहां सुना ‘शिवम्-शिवम्’।
यह कार्यक्रम शब्दों, संगीत और ऊर्जा का सुंदर मेल है। यहां आपको कला, संस्कृति, अभिनय, हंसी और प्रेरणा- सब कुछ एक साथ देखने को मिलेगा। रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क की ओर से आप सभी ‘संगम’ के लिए आमंत्रित हैं। आइए साहित्य, संगीत और भारतीय संस्कृति के इस खास कार्यक्रम का हिस्सा बनिए।
‘संगम’ को कामयाब बनाने में कई स्पॉन्सर आगे आए हैं, जिसके लिए हम उन्हें धन्यवाद देते हैं।