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इंजीनियर युवराज की मौत मामले में बड़ा अपडेट बिल्डर निर्मल सिंह के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी गिरफ्तार…


Noida Engineer Death case

युवराज की दर्दनाक मौत से प्रशासन पर उठे सवाल | Image:
Screen Grab/X

इंजीनियर युवराज की मौत मामले में ग्रेटर नोएडा पुलिस ने बिल्डर के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया है। पुलिस ने लोटस ग्रीन के बिल्डर निर्मल सिंह के खिलाफ गैर जमानती वारंट (NBW) जारी कर दिया है। हालांकि निर्मल सिंह अभी फरार है, लेकिन पुलिस लगातार निर्मल सिंह की गिरफ्तार के लिए दबिश भी दे रही है। मामले में ग्रेटर नोएडा पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है।

बिल्डर से जुड़े दो लोग गिरफ्तार 

बता दें, इंजीनियर युवराज मेहता की मौत मामले में नोएडा पुलिस की पहले ही बहुत किरकिरी हो चुकी है, और अब कोई भी कोताही नहीं बरतना चाह रही है, इसीलिए पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। 

पुलिस के मुताबिक, गुरुवार को ग्रेटर नोएडा पुलिस ने लोटस ग्रीन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड और बिल्डर से जुड़े रवि बंसल और सचिन करणवाल को गिरफ्तार किया था। वहीं दो बिल्डर के ऑफिस को सील कर दिया था।

पांच अन्य व्यक्तियों के खिलाफ FIR दर्ज

इससे पहले पांच अन्य व्यक्तियों (अभय कुमार, संजय कुमार, मनीष कुमार, अचल बोहरा और निर्मल कुमार) के खिलाफ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम और भारतीय दंड संहिता के तहत FIR दर्ज की गई है। गड्ढा गहरा था, बिना बैरिकेड के था और प्रदूषित पानी से भरा था, जिससे आसपास के निवासियों को परेशानी हो रही थी। 

यह गड्ढा मानव जीवन के लिए खतरा था, और वहां कोई चेतावनी संकेत या सुरक्षा उपाय नहीं थे। जमीन 2014 में लोटस ग्रीन कंस्ट्रक्शन ने खरीदी थी और 2020 में विजटाउन को बेच दी थी, लेकिन कंपनी अभी भी इसमें हिस्सा रखती है।

सीएम योगी ने 5 दिन में मांगी जांच रिपोर्ट

सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एसआईटी टीम गठित की गई है, जो युवराज मेहता की मौत की जांच कर रही है। सीएम योगी ने 5 दिन में जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए थे। इसके बाद NDRF कर्मियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया, जहां युवराज की कार पानी से भरे गड्ढे में गिर गई थी।  नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने इस घटना का स्वतः संज्ञान लिया है और पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन व प्रशासनिक निष्क्रियता को लेकर अधिकारियों से जवाब मांगा है।

SIT की रिपोर्ट में क्या?

नोएडा प्राधिकरण ने एसआईटी को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें हादसे से संबंधित प्रमुख प्रशासनिक और तकनीकी पहलुओं को शामिल किया गया है। रिपोर्ट के जरिए यह स्पष्ट करने की कोशिश की गई है कि संबंधित परियोजना में जरूरी अनुमतियां किस स्तर पर दी गईं, बुनियादी सुविधाएं कब विकसित हुईं और सुरक्षा इंतजामों को लेकर प्राधिकरण की क्या भूमिका रही। साथ ही, हादसे से पहले और बाद में प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाइयों का भी ब्यौरा दिया गया है।

एसआईटी ने इस घटना को गंभीर मानते हुए आपदा प्रबंधन से जुड़े तंत्र की भी जांच की है। जिला प्रशासन से यह जानकारी मांगी गई कि संकट की घड़ी में संबंधित विभागों ने आपस में कैसे समन्वय किया और किस तरह की कार्ययोजना पर अमल हुआ। दस्तावेजों में यह बताया गया है कि सूचना मिलते ही किन एजेंसियों को सक्रिय किया गया, राहत और बचाव में किस स्तर पर संसाधन लगाए गए और पूरे ऑपरेशन की निगरानी किस तरह की गई।

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