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सोनिया राहुल समेत पर ने दाखिल की चार्जशीट करोड़ों की संपत्तियों पर कब्जे की तैयारी


कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी | फाइल फोटो

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ नेशनल हेराल्ड मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में चार्जशीट दाखिल की है। समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, इस चार्जशीट में कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा और सुमन दुबे को भी आरोपी बनाया गया है। यह कदम कांग्रेस से जुड़े नेशनल हेराल्ड अखबार और असोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) से संबंधित 661 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों पर कब्जे की कार्रवाई शुरू करने के दो दिन बाद आया है।

ईडी ने 11 अप्रैल को दिल्ली, मुंबई और लखनऊ में संपत्ति रजिस्ट्रारों को नोटिस जारी कर, मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत एजेएल की संपत्तियों पर कब्जा करने का निर्देश दिया था। जांच एजेंसी का दावा है कि यह संपत्तियां कथित तौर पर अवैध रूप से हासिल की गई थीं। नेशनल हेराल्ड मामले में ईडी लंबे समय से जांच कर रही है, जिसमें कथित वित्तीय अनियमितताओं और धन के दुरुपयोग का आरोप है।

इसी बीच, मंगलवार को ईडी ने एक अन्य मामले में राहुल गांधी के बहनोई और व्यवसायी रॉबर्ट वाड्रा को समन जारी किया। वाड्रा से जमीन सौदे से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ की जाएगी। यह कार्रवाई विपक्ष के नेता राहुल गांधी के करीबी रिश्तेदार के खिलाफ जांच को और तेज करती है। कांग्रेस ने इन कार्रवाइयों को राजनीति से प्रेरित बताया है और कहा कि सरकार जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। दूसरी ओर, ईडी का कहना है कि उसकी कार्रवाई कानून के दायरे में और सबूतों के आधार पर की जा रही है। 

क्या है नेशनल हेराल्ड केस?

नेशनल हेराल्ड अखबार पहले AJL द्वारा प्रकाशित होता था। इस कंपनी की स्थापना स्वतंत्रता से पहले हुई थी और इसके पास दिल्ली, मुंबई और लखनऊ जैसे शहरों में कई कीमती संपत्तियां थीं। ED का आरोप है कि YIL ने AJL को सिर्फ 50 लाख रुपये में खरीद लिया, जबकि इसकी संपत्तियों की कीमत 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है। इस सौदे में वित्तीय अनियमितता और धोखाधड़ी के आरोप लगे हैं। 

यह मामला पहली बार 2014 में तब सुर्खियों में आया, जब बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने दिल्ली की एक अदालत में शिकायत दर्ज की। स्वामी ने आरोप लगाया कि सोनिया और राहुल गांधी ने AJL की संपत्तियों को गलत तरीके से YIL के नाम कर लिया। इसके बाद ED ने 2021 में इसकी जांच शुरू की। जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए, जैसे कि YIL को फर्जी दान के जरिए 18 करोड़ रुपये मिले, 38 करोड़ रुपये एडवांस किराए के रूप में लिए गए और 29 करोड़ रुपये विज्ञापनों के जरिए जुटाए गए।

 

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First Published – April 15, 2025 | 6:38 PM IST



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