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मुजफ्फरपुर पुलिस महकमे ने कानून व्यवस्था और अनुशासन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) कार्यालय ने एक अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। मुजफ्फरपुर के नगर थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर कमलेश कुमार को ‘लाइन हाजिर’ कर दिया गया है।
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उन पर काम में घोर शिथिलता, मनमानी और वरीय अधिकारियों सहित माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों के उल्लंघन का गंभीर आरोप है। इस कार्रवाई की मुख्य वजह भूमि विवाद से जुड़ा एक पुराना मामला है, जो माननीय उच्च न्यायालय में लंबित था।
हाई कोर्ट ने जताई थी आपत्ति
कोर्ट ने इस मामले में कुछ विशिष्ट निर्देश जारी किए थे, जिनका अनुपालन नगर थानाध्यक्ष को समय सीमा के अंदर करना था। थानाध्यक्ष की ओर से इन आदेशों की अनदेखी पर उच्च न्यायालय ने कड़ी आपत्ति जताई और अपनी स्पष्ट अप्रसन्नता जाहिर की।
न्यायालय की इस टिप्पणी को पुलिस मुख्यालय ने गंभीरता से लिया, जिसके बाद मामले की आंतरिक जांच के आदेश दिए गए। अपर पुलिस अधीक्षक (नगर-01), मुजफ्फरपुर ने विस्तृत जांच की। जांच रिपोर्ट में थानाध्यक्ष के आचरण को अनुशासनहीनता और स्वेच्छाचारिता का परिचायक माना गया।
इस रिपोर्ट के आधार पर तिरहुत क्षेत्र के पुलिस उप-महानिरीक्षक (DIG) चंदन कुशवाहा के अनुमोदन के बाद, एसएसपी कांतेस कुमार मिश्रा ने थानाध्यक्ष को तपुलिस केंद्र, मुजफ्फरपुर वापस (लाइन हाजिर) बुलाने का लेटर जारी कर दिया।
पुलिस विभाग का कड़ा संदेश
मुजफ्फरपुर पुलिस कप्तान कांतेश कुमार मिश्रा ने इस कार्रवाई के माध्यम से विभाग के भीतर एक स्पष्ट संदेश दिया है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
एसएसपी कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि आम जनता के काम में देरी, न्यायालय के आदेशों की अवहेलना और वरीय पदाधिकारियों के निर्देशों की अनदेखी करना अनुशासनहीनता की श्रेणी में आती है। पुलिस प्रशासन की छवि को धूमिल करने वाले अधिकारियों और कर्मियों पर भविष्य में भी इसी तरह की कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।