
Love Jihad Law: महाराष्ट्र में जबरन धर्म परिवर्तन और ‘लव जिहाद’ जैसी प्रथाओं पर रोक लगाने के लिए नया कानून बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। महाराष्ट्र सरकार ने “महाराष्ट्र फ्रीडम ऑफ रिलीजन बिल 2026” को विधानसभा में पेश किया और हाल ही में इसे पास कर दिया गया है।
13 मार्च 2026 को देवेंद्र फडणवीस सरकार ने बजट सत्र के दौरान इस बिल को विधानसभा में पेश किया था। चर्चा के बाद 16 मार्च 2026 को विधानसभा में ध्वनि मत से इसे बहुमत से पास कर दिया गया। अब यह बिल महाराष्ट्र विधान परिषद (ऊपरी सदन) में चर्चा और मंजूरी के लिए जाएगा। अगर परिषद से भी पास हो जाता है, तो इसे राज्यपाल की मंजूरी के बाद कानून का दर्जा मिलेगा।
यह विधेयक संविधान द्वारा धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा करते हुए जबरन, धोखाधड़ी या प्रलोभन से होने वाले धर्म परिवर्तन को रोकने पर केंद्रित है। इसके कानून बनने पर अवैध धर्म परिवर्तन, जबरदस्ती, धोखे, प्रलोभन, अनुचित प्रभाव, शादी के बहाने से कराया जाना पूरी तरह प्रतिबंधित होगा।
शादी के बहाने धर्म बदलवाने या लव जिहाद पर 7 साल तक की कैद और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना। सामूहिक अवैध धर्म परिवर्तन पर 7 साल की सजा और 5 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। गंभीर या दोहराए गए मामलों में सजा 10 साल तक की कैद और 7 लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है।
स्वैच्छिक धर्म परिवर्तन का प्रावधान
इस विधेयक में अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन का प्रावधान भी दिया है। स्वैच्छिक धर्म परिवर्तन के लिए जिला मजिस्ट्रेट या संबंधित अधिकारी को 60 दिन पहले लिखित सूचना देनी अनिवार्य होगी। अवैध धर्म परिवर्तन से हुई शादी में जन्मे बच्चे को मां का मूल धर्म (शादी से पहले का) का माना जाएगा। ऐसे अपराध संज्ञेय (Cognisable) और गैर-जमानती (Non-bailable) होंगे। माता-पिता, भाई-बहन या अन्य रिश्तेदार शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
पहले से कई राज्यों में है कानून
भारत में लव जिहाद के मामले लगातार सामने आते रहते हैं। ऐसे केस को रोकने और दोषियों को सजा दिलाने के लिए कई राज्य सरकारों ने कानून बनाए हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को कहा कि ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक और राजस्थान सहित कई राज्यों में धर्मांतरण विरोधी कानून पहले से ही लागू हैं।
महाराष्ट्र भी अब इस तरह का कानून लाने वाला कई राज्यों में शामिल हो जाएगा। सरकार का कहना है कि यह बिल धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करेगा, विशेष रूप से महिलाओं और कमजोर वर्गों को जबरन या छल से धर्म बदलने से बचाएगा। यह बिल राज्य में जबरन धर्मांतरण रोकने की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है, लेकिन अंतिम कानून बनने में विधान परिषद की मंजूरी और अन्य प्रक्रियाएं बाकी हैं।