
LPG Crisis: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल मचा दी है। भारत में भी इसका असर गैस आपूर्ति पर देखने को मिल रहा है, जिससे उपभोक्ताओं के बीच चिंता की लहर है। इसी बीच, गैस संकट और सब्सिडी को लेकर मचे घमासान के दौरान केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए ई-केवाईसी (e-KYC) पर एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। एजेंसी के चक्कर काटने पड़ेंगे, तो मंत्रालय का यह नया अपडेट आपके लिए बड़ी राहत लेकर आया है। आइए जानते हैं।
किसे करानी होगी e-KYC और किसे नहीं?
मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण केवल उन्हीं ग्राहकों के लिए अनिवार्य है, जिन्होंने अब तक अपनी केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं की है।
यदि आप प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थी नहीं हैं और आपने पहले ही अपनी केवाईसी प्रक्रिया पूरी कर ली है, तो आपको इसे दोबारा करने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।
उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थी जो हैं, इन ग्राहकों के लिए नियम थोड़े अलग हैं। सब्सिडी का निरंतर लाभ उठाने के लिए उज्ज्वला लाभार्थियों को साल में एक बार केवाईसी प्रक्रिया को पूरा करना होगा।
33 करोड़ उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत
भारत में इस समय 33 करोड़ से अधिक एलपीजी उपभोक्ता हैं, जिनमें से लगभग 10.51 करोड़ प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत आते हैं। देशभर में जारी गैस की किल्लत की खबरों के बीच, आम जनता में यह डर था कि केवाईसी न होने की स्थिति में उनकी गैस सप्लाई रोक दी जाएगी।
मंत्रालय ने इस भ्रम को जड़ से खत्म करते हुए कहा है कि केवाईसी प्रक्रिया के कारण गैस रिफिल की आपूर्ति में कोई बाधा नहीं आएगी।
बता दें कि 15 मार्च को मंत्रालय की ओर से जारी एक आदेश में कहा गया था कि सभी घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण अनिवार्य है। इस आदेश के बाद गैस एजेंसियों पर भारी भीड़ देखी गई थी।
आज मंगलवार को मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि 15 मार्च वाली पोस्ट का उद्देश्य केवल उन ग्राहकों को प्रोत्साहित करना था जिन्होंने अभी तक प्रमाणीकरण नहीं कराया है। यह सरकार के उन निरंतर प्रयासों का हिस्सा है जिससे एलपीजी वितरण प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाया जा सके।