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जेएनयू में नहीं थम रहा बवाल मार्च पर अड़े छात्र और पुलिस के बीच झड़प के बाद बिगड़े हालत समेत कई पुलिसकर्मी घायल…



दिल्ली का जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय यानी JNU में बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। छात्रों के विरोध प्रदर्शन कम होने की जगह तेज होते जा रहे हैं। JNU स्टूडेंट यूनियन ने UGC के नियमों को लागू करने की मांग को लेकर शुक्रवार को सुबह-सुबह प्रोटेस्ट किया। इससे पहले गुरुवार को पूरी रात यूनिवर्सिटी कैंपस में बवाल होता है। पुलिस ने मार्च करने से रोका तो बात मारपीट और हाथापाई पर उतर आए। छात्रों और पुलिस के बीच झड़प के ACP समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं।

JNU में गुरुवार को छात्र संघ (JNUSU) के विरोध मार्च के दौरान पुलिस के साथ हिंसक झड़प हुई, जिसके कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो में छात्रों को पुलिसकर्मियों पर हमला करते हुए दिखाया गया है, जिसमें एक छात्र द्वारा पुलिसकर्मी को थप्पड़ मारना और दूसरे द्वारा लाठी-डंडा फेंकना शामिल है। पुलिस ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़े, जूते, लाठियां, बैनर फेंके और यहां तक कि कुछ पुलिसकर्मियों को मारने की कोशिश की, जिससे कई पुलिसकर्मी घायल हुए।

छात्र और पुलिस के बीच झड़प के बाद बिगड़े हालत

कैंपस गेट पर पहुंचते ही पुलिस ने मार्च की अनुमति न होने का हवाला देते हुए रोकने की कोशिश की, जिससे तनाव बढ़ गया और हालात बिगड़ गए। पुलिस ने दावा किया कि छात्रों ने हमला किया, जबकि प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पुलिस ने अ बल प्रयोग किया और उन्हें मनमाने ढंग से हिरासत में लिया। झड़प में कुल 51 से अधिक छात्रों को शुरुआत में हिरासत में लिया गया, जबकि पुलिस ने 25 पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात कही।

शुक्रवार को JNU मामले में गिरफ्तार किए गए सभी 14 आरोपियों को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने 25 हजार रुपये के निजी मुचलके पर सभी छात्रों को जमानत दे दी। पुलिस ने अदालत को बताया कि आरोपी पहले भी कई मौकों पर प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग कर चुके हैं और इस संबंध में पहले भी चार अलग-अलग एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। दिल्ली पुलिस ने कहा कि यह शांतिपूर्ण प्रदर्शन नहीं था, बल्कि प्रदर्शनकारियों द्वारा हिंसा की गई।

पुलिस ने अदालत में बताया कि करीब 300 लोगों का मार्च बिना अनुमति इंडिया गेट की ओर निकाला जा रहा था। इस दौरान जब पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोकने की कोशिश की, तब आरोपियों ने पुलिस अधिकारियों के साथ कथित रूप से धक्का-मुक्की और हमला किया। मामले में वसंत कुंज नॉर्थ थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं (अवैध सभा, दंगा भड़काना आदि) के तहत FIR दर्ज की गई।

बता दें कि पूर विवाग कुलपति संतिश्री डी पंडित के हालिया विवादास्पद बयानों से जुड़ी है। कुलपति ने एक पॉडकास्ट में दलितों और काले समुदायों के बारे में “स्थायी पीड़ित मानसिकता” पर टिप्पणी की थी, जिसे छात्र संगठनों ने जातिवादी करार दिया और उनकी माफी व इस्तीफे की मांग की। छात्रों ने यूजीसी की इक्विटी (एंटी-डिस्क्रिमिनेशन) रेगुलेशंस लागू करने, रोहित एक्ट सहित अन्य मांगों के साथ शिक्षा मंत्रालय तक लॉन्ग मार्च निकालने का ऐलान किया था।



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