
Blue City: भारत अपनी विभिन्न संस्कृति, सभ्यता और रंगों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यहां हर शहर की अपनी एक अलग पहचान और रंगत है। जहां जयपुर को इसकी गुलाबी आभा के लिए ‘पिंक सिटी’ कहा जाता है, वहीं राजस्थान का ही एक और ऐतिहासिक शहर अपनी नीली चमक के लिए विश्व प्रसिद्ध है। हम बात कर रहे हैं जोधपुर की, जिसे ‘ब्लू सिटी’ के नाम से जाना जाता है।
जब आप जोधपुर के मेहरानगढ़ किले की ऊंचाई से नीचे शहर की ओर देखते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे धरती पर नीले बादलों का कोई समंदर बिछा हो। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इस शहर को नीला रंग ही क्यों दिया गया? इसके पीछे कोई एक कारण नहीं, बल्कि ऐतिहासिक, वैज्ञानिक और धार्मिक मान्यताओं का एक दिलचस्प मिश्रण है।
जोधपुर को क्यों कहा जाता है नीला शहर?
जोधपुर के घरों के नीले होने के पीछे कई कहानियां प्रचलित है। आपको बता दें, राजस्थान अपनी चिलचिलाती गर्मी के लिए जाना जाता है, जहां गर्मियों में तापमान अक्सर बढ़ जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक नीला रंग सूर्य की किरणों को रिफ्लेक्ट करने की क्षमता रखता है। घरों की बाहरी दीवारों पर नीला पेंट करने से घर के अंदर का तापमान कम रहता है, जिससे तपती गर्मी में भी राहत मिलती है।
दीमकों और कीड़ों से सुरक्षा के लिए नीला रंग
पुराने समय में यहां के घरों में दीमकों की बड़ी समस्या थी। इस समस्या से निपटने के लिए चूने में कॉपर सल्फेट मिलाया जाने लगा। कॉपर सल्फेट का मिश्रण न केवल दीमकों को भगाता था, बल्कि सूखने के बाद दीवारों को एक खूबसूरत नीला रंग भी देता था।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नीला रंग का संबंध भगवान शिव से बताया गया है। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, जोधपुर के ब्राह्मण समुदाय ने खुद को अन्य वर्गों से अलग दिखाने और शांति के प्रतीक के रूप में अपने घरों को नीले रंग से रंगना शुरू किया था। समय के साथ, यह परंपरा पूरे शहर की पहचान बन गई और अन्य समुदायों ने भी इसे अपना लिया।