
AI Impact Summit 2026 : इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में चीनी ‘रोबोडॉग’ विवाद के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं। समिट से बाहर किए जाने के बाद अब विश्वविद्यालय एक नए विवाद में घिर गया है। इस बार मामला ‘ड्रोन सॉकर’ से जुड़ा है, जिसे कथित तौर पर दक्षिण कोरिया में निर्मित बताया जा रहा है, लेकिन इसे यूनिवर्सिटी का खुद का उत्पाद बताकर पेश किया गया।
जानकारी के मुताबिक, नोएडा स्थित गलगोटिया यूनिवर्सिटी पर आरोप है कि उसने कोरियाई सॉकर ड्रोन को अपना इन-हाउस प्रोजेक्ट बताकर प्रदर्शित किया। यूथ कांग्रेस ने इसके वीडियो को अपने एक्स पर शेयर किया है। यूनिवर्सिटी की एक प्रोफेसर ने दावा किया कि यह ड्रोन पूरी तरह कैंपस में ही तैयार किया गया है। इस पूरे विवाद के बीच कम्युनिकेशन प्रोफेसर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इससे पहले भी वह रोबोडॉग विवाद में चर्चा में रही थीं और अब एक बार फिर सुर्खियों में हैं।
First China, now Korea. Galgotias is on a world tour of 'borrowed' innovation. .
They claimed to have built India’s first Drone Soccer from scratch on campus, but it’s actually just a Striker V3 ARF from Korea.
Atmanirbhar’ or just ‘Atmanir-buy’ Modi ji? pic.twitter.com/8iRUeU0aAJ
— Indian Youth Congress (@IYC) February 18, 2026
वीडियो में वे एक रिपोर्टर को ‘इन-हाउस सॉकर ड्रोन’ के बारे में जानकारी देती नजर आ रही हैं। उन्होंने दावा किया, 'यह एक दिलचस्प डिवाइस है। इसकी एंड-टू-एंड इंजीनियरिंग से लेकर एप्लिकेशन तक सब कुछ यूनिवर्सिटी में ही विकसित किया गया है।'
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उन्होंने यह भी कहा कि गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने अपने कैंपस में भारत का पहला ‘ड्रोन सॉकर एरीना’ तैयार किया है। उन्होंने कहा कि यहां सिमुलेशन लैब और एप्लिकेशन एरीना मौजूद है… यह भारत का पहला सॉकर एरीना ऑन कैंपस है। यहां इस प्रोडक्ट को और उन्नत फीचर्स के साथ विकसित किया जा रहा है।
Galgotias University’s communications professor, Neha, has responded to the controversy surrounding the display of a Chinese-made robot dog at the AI Impact Summit, saying the issue escalated due to a “misinterpretation that went viral online”.
Emphasising the institution’s… https://t.co/a8XCkNNnns pic.twitter.com/Rnkb8HK3mP
— Vani Mehrotra (@vani_mehrotra) February 18, 2026
हालांकि, अब इस दावे पर सवाल उठ रहे हैं और सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है कि क्या यह तकनीक वास्तव में यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित की गई है या नहीं। लगातार सामने आ रहे विवादों के चलते गलगोटिया यूनिवर्सिटी एक बार फिर जांच और आलोचना के घेरे में है। Edited by : Sudhir Sharma