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औरंगाबाद के जिला विधिक सेवा प्राधिकार की देखरेख में आने वाले राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियों को लेकर आज प्राधिकार के सभागार में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता सचिव तान्या पटेल ने की। इस दौरान वकीलों-लिपिकों से राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने और सुलहनीय मामलों के निपटारा में सक्रिय मदद देने की अपील की। बैठक को संबोधित करते हुए सचिव ने कहा कि वकील लिपिक कोर्ट में आने वाले वादकारियों के सबसे पास होते हैं। ऐसे में लोगों के हितों की रक्षा और उनके मामलों के समाधान में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। राष्ट्रीय लोक अदालत में सुलहनीय आपराधिक वादों का अधिकाधिक निस्तारण काफी हद तक अधिवक्ता लिपिकों की सक्रियता और प्रयासों पर निर्भर करता है। लोक अदालत में निपटाने के लिए करें प्रेरित सचिव ने उपस्थित लिपिकों को निर्देश दिया कि वे अभी से अपने-अपने मुवक्किलों को सुलह योग्य मामलों को राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से निपटाने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने यह भी बताया कि लोक अदालत के जरिए अलग-अलग प्रकार के मामलों का तुरंत, आसान और आपसी सहमति से समाधान संभव है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया सरल होती है और समय व धन दोनों की बचत होती है। बैठक के दौरान सचिव की ओर से वकील-लिपिकों को यह भी विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई कि किन-किन धाराओं और मामलों का निस्तारण राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से किया जा सकता है। इस जानकारी से लिपिकों को अपने मुवक्किलों का मार्गदर्शन करने में सहायता मिलेगी। अधिवक्ता लिपिकों ने भी बैठक में आश्वस्त किया कि वे सुलहनीय वादों के निस्तारण में पूरी निष्ठा और तत्परता के साथ सहयोग करेंगे। सचिव तान्या पटेल ने कहा कि सुलह के आधार पर किसी मामले का निपटारा करना केवल एक केस खत्म करना नहीं है, बल्कि यह मुवक्किलों के साथ विश्वास और संबंध को और मजबूत बनाता है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से “मध्यस्थता विशेष अभियान” भी संचालित किया जा रहा है। इस अभियान के तहत अधिवक्ता लिपिकों से अपेक्षा की गई कि वे संबंधित वादकारियों को समझौते के माध्यम से विवादों के समाधान के लिए प्रेरित करें।
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