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बिहार विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान एनडीए सरकार के विश्वास मत पर चर्चा करते हुए जदयू ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शासनकाल को राज्य के पुनर्जन्म का काल बताया। जेडीयू के विधायक दल के नेता और पूर्व मंत्री श्रवण कुमार ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले दो दशकों में बिहार ने अपमान के दौर को पीछे छोड़कर स्वाभिमान की एक नई गाथा लिखी है। उन्होंने विपक्ष पर कड़ा प्रहार करते हुए याद दिलाया कि साल 2005 से पहले बिहार की पहचान ‘अपहरण उद्योग’, ‘चारा घोटाला’ और ‘जंगलराज’ के रूप में होती थी। अंतरराष्ट्रीय मीडिया और बीबीसी जैसी संस्थाओं में राज्य की छवि बेहद धूमिल थी, लेकिन नीतीश कुमार के संकल्पों ने ‘बिहारी’ शब्द को अपमान के बजाय गौरव का प्रतीक बना दिया है। जदयू नेता ने महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में बिहार को देश का पथ-प्रदर्शक बताते हुए कहा कि राज्य ने इस दिशा में क्रांतिकारी कदम उठाए हैं। उन्होंने सदन को अवगत कराया कि बिहार देश का पहला ऐसा राज्य बना,जिसने त्रिस्तरीय पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देकर उन्हें सत्ता के केंद्र में बिठाया। बिहार पुलिस में 30 हजार से अधिक बेटियां तैनात सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 35 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था का ही परिणाम है कि आज बिहार पुलिस में 30 हजार से अधिक बेटियां तैनात हैं, जो पूरे देश के लिए एक अद्वितीय मिसाल है। इसके अलावा जीविका दीदियों के माध्यम से राज्य में सामाजिक और आर्थिक क्रांति आई है, जिसमें 11 लाख 88 हजार स्वयं सहायता समूहों ने डेढ़ करोड़ परिवारों को सीधे तौर पर विकास की मुख्यधारा से जोड़ा है। ग्रामीण परिदृश्य में आए बदलावों की चर्चा करते हुए उन्होंने ‘सात निश्चय’ योजना को मील का पत्थर करार दिया। श्रवण कुमार ने कहा कि जब यह योजना शुरू हुई थी, तब विरोधियों ने इसके बजट और सफलता पर सवाल खड़े किए थे, लेकिन सरकार ने महात्मा गांधी, डॉ. लोहिया और बाबा साहब अंबेडकर के सपनों को धरातल पर उतारते हुए दलित बस्तियों से विकास की शुरुआत की। सदन के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया कि जदयू और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पूर्ण समर्थन सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार को हासिल है। उन्होंने विश्वास जताया कि वर्तमान एनडीए सरकार मुख्यमंत्री के संकल्पों को पूरा करते हुए बिहार को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।
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