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पश्चिम बंगाल में वोटिंग से पहले की बड़ी कार्रवाई कोलकाता के घर रेड जॉय कामदार के ठिकानों की भी तालाशी…



पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में कोलकाता पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी और एक प्रमुख कारोबारी के ठिकानों पर छापेमारी की है। ED की यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की जा रही है। ईडी के अधिकारी सुबह-सुबह ही इनके ठिकानों की तलाशी लेने पहुंचे।

ED के अधिकारी रविवार को कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा बिस्वास और सन एंटरप्राइज के मैनेजिंग डायरेक्टर जय एस कामदार से जुड़े तीन ठिकानों पर तलाशी ली। 

अधिकारियों ने बताया कि ये छापे ED की कोलकाता यूनिट ने खास इनपुट के आधार पर ये छापेमरी की। ईडी के अधिकारी सुबह-सुबह ही DCP शांतनु सिन्हा बिस्वास के घर पहुंच गई। कोलकाता डीएसपी और सन एंटरप्राइज के मैनेजिंग डायरेक्टर जॉय कामदार से जुड़े तीन ठिकानों पर तलाशी ली गई। इन 3 जगहों में से 2 शांतनु सिन्हा बिस्वास की और एक जॉय कामदार की है। ये छापे सोना पप्पू और जॉय कामदार केस में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत मारे जा रहे हैं।

सोना पप्पू और जॉय कामदार केस में कार्रवाई

ह कार्रवाई ED द्वारा 18 दिन पहले, 1 अप्रैल को कोलकाता भर में आठ ठिकानों पर तलाशी लेने के लगभग 18 दिन बाद हुई है। वह मामला बिस्वजीत पोद्दार उर्फ ​​’सोना पप्पू’, जय एस कामदार और अन्य लोगों से जुड़ा था। उस तलाशी के दौरान, 1.47 करोड़ रुपये की नकदी, 67.64 लाख रुपये के सोने के गहने और चांदी, साथ ही कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए थे।

ED ने बताया है कि जमीन और इमारतों के रूप में कई अचल संपत्तियों की पहचान की गई है, जो देखने में ऐसा लगता है कि आपराधिक गतिविधियों के जरिए हासिल की गई हैं।

अधिकारियों ने उस समय एक फॉर्च्यूनर गाड़ी भी जब्त की थी, जिसका इस्तेमाल ‘सोना पप्पू’ करता था। इसके अलावा, कोलकाता के फर्न रोड स्थित ‘सोना पप्पू’ के घर से एक बंदूक (रिवॉल्वर) भी बरामद हुई थी, जिस पर “Made in USA” लिखा था। इस बंदूक को पश्चिम बंगाल पुलिस विभाग को सौंप दिया गया। यह कदम ED की ओर से पश्चिम बंगाल विधानसभा 2026 के चुनावों को स्वतंत्र, निष्पक्ष और बिना किसी डर के संपन्न कराने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का एक हिस्सा था।

ED के अनुसार, ‘सोना पप्पू’ और अन्य लोगों के खिलाफ जांच पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा दर्ज की गई कई FIR के आधार पर शुरू की गई थी। ये FIR भारतीय दंड संहिता, 1860 और शस्त्र अधिनियम, 1959 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई थीं। इन लोगों पर दंगा करने, हत्या का प्रयास करने, आपराधिक साजिश रचने और शस्त्र अधिनियम का उल्लंघन करने का आरोप है।



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