Chatra Vidhan Sabha क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण इलाकों में विकास कार्यों की स्थिति को लेकर लोगों में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान स्थानीय नेताओं द्वारा क्षेत्र के समग्र विकास, रोजगार सृजन, बेहतर सड़क निर्माण, पेयजल व्यवस्था और बिजली आपूर्ति को सुधारने के कई वादे किए गए थे, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि इनमें से अधिकांश वादे अब तक अधूरे हैं।

क्षेत्र के कई गांवों में आज भी कच्ची या जर्जर सड़कें लोगों की दैनिक आवाजाही को कठिन बनाती हैं। बरसात के मौसम में हालात और भी खराब हो जाते हैं, जब कई गांवों का संपर्क मुख्य सड़कों से लगभग कट जाता है। इससे न सिर्फ आम लोगों को परेशानी होती है, बल्कि आपातकालीन सेवाओं पर भी असर पड़ता है।
पेयजल की समस्या भी गंभीर बनी हुई है। कई जगहों पर हैंडपंप खराब पड़े हैं या पानी की उपलब्धता सीमित है, जिसके कारण ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं को दूर-दूर तक पानी लाने के लिए जाना पड़ता है। बिजली आपूर्ति की स्थिति भी स्थिर नहीं है, जिससे घरेलू जीवन के साथ-साथ छोटे व्यवसाय और पढ़ाई पर भी असर पड़ रहा है।
रोजगार का मुद्दा क्षेत्र के युवाओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों की कमी के कारण बड़ी संख्या में युवा दूसरे राज्यों की ओर पलायन कर रहे हैं। इससे न केवल परिवारों पर सामाजिक और आर्थिक दबाव बढ़ रहा है, बल्कि गांवों का विकास भी प्रभावित हो रहा है।
किसानों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था न होने और सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर न मिलने से खेती पर निर्भर परिवारों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय नेताओं द्वारा किए गए वादे अब सिर्फ कागजों और भाषणों तक सीमित रह गए हैं। लोगों के बीच यह भावना बनती जा रही है कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन मूलभूत समस्याओं पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया, तो इसका प्रभाव आने वाले चुनावों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है। जनता अब केवल वादों से संतुष्ट नहीं है, बल्कि वह जमीनी स्तर पर ठोस और दिखाई देने वाला विकास चाहती है।