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सहरसा शहर के गांधी पथ स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर छात्रावास के छात्रों ने पुराने भवन तोड़ने के प्रशासन के फैसले के विरोध में शनिवार से अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। छात्रों का आरोप है कि परिसर में पर्याप्त खाली जमीन उपलब्ध होने के बावजूद पुराने भवनों को तोड़कर नया निर्माण किया जा रहा है। छात्रों के अनुसार, इस छात्रावास का निर्माण कल्याण विभाग द्वारा वर्ष 1990 में दलित छात्रों के रहने और पढ़ाई की सुविधा के लिए कराया गया था, जिसमें लगभग 75 कमरे थे। हाल ही में राज्य सरकार के एक पूर्व मंत्री के निरीक्षण के दौरान छात्रावास में 100 अतिरिक्त बेड बढ़ाने का निर्देश दिया गया था, जिसके बाद अधिकारियों ने परिसर में मौजूद पुराने भवनों को ध्वस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। ”छात्रावास के कई भवन अभी भी पूरी तरह रहने योग्य स्थिति में” छात्र नेता संजय पासवान ने बताया कि छात्रावास के कई भवन अभी भी पूरी तरह रहने योग्य स्थिति में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विभागीय स्तर पर इन भवनों को जर्जर बताकर गिराने की योजना बनाई जा रही है। पासवान ने इस निर्णय को बिना उचित जांच के लिया गया बताया और इसमें अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका भी जताई। छात्रों को बाहर किराए पर कमरा लेकर पढ़ाई करनी पड़ेगी – स्टूडेंट छात्रों की मुख्य मांग है कि पुराने और उपयोगी भवनों को न तोड़ा जाए, बल्कि परिसर में उपलब्ध खाली पड़ी जमीन पर नए भवन का निर्माण किया जाए। उनका कहना है कि यदि पुराने भवन तोड़े गए, तो वर्तमान में रह रहे छात्रों को बाहर किराए पर कमरा लेकर पढ़ाई करनी पड़ेगी, जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा और उनकी पढ़ाई प्रभावित होगी। धरना पर बैठे छात्रों ने स्पष्ट किया है कि जब तक जिला प्रशासन इस मामले में हस्तक्षेप कर कोई ठोस समाधान नहीं निकालता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। फिलहाल, प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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