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मां से बेइंतहा मोहब्बत पिता की मौत ने कर्ज में ढकेला महीने से फीस न दे पाया तो बेच दी किडनी कानपुर के…



कानपुर पुलिस ने हाल ही में एक बड़े अवैध किडनी ट्रांसप्लांट गैंग का भंडाफोड़ किया है। मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, चौकाने वाले खुलासे हो रहे हा। इस रैकेट में बिहार का रहने वाला एक MBA का छात्र भी फंस गया। अब उसके किडनी बेचने के फैसले पीछे का जो सच सामने आया है, वो दर्द भरी कहानी सुनकर हर किसी की आंखे भर जा रही है। फिलहाल छात्र आयुष अस्पताल में भर्ती है और बिस्तर पर लेटे -लेटे भी अपनी मां की चिंता कर रहा है।

अवैध किडनी ट्रांसप्लांट के डोनर 23 साल का आयुष देहरादून के ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी में MBA का छात्र है। कानपुर किडनी कांड का खुलासा होने के बाद इसकी दर्दभरी कहानी दुनिया के सामने आ रही है। आर्थिक तंगी के कारण एमबीए की फीस जमा करने के लिए आयुष ने अपनी एक किडनी बेचने का फैसला किया, लेकिन उसे क्या पता कि वो एक रैकेट का शिकार हो जाएगा। गैंग द्वारा ठगे जाने के बाद उसने खुद पुलिस से संपर्क कर पूरे मामले का पर्दाफाश कर दिया।

ICU में भर्ती आयुष

तबीयत बिगड़ने के बाद डोनर आयुष और किडनी लेने वाली पारुल तोमर को जीएसवीएम मेडिकल कालेज के सुपर स्पेशियलिटी ब्लाक से उच्च चिकित्सा के लिए लखनऊ के डा राम मनोहर लोहिया संस्थान में रेफर किया गया। अभी वो LLRM के ICU भर्ती है और उसे डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। मगर अस्पताल के बेड पर भी उसकी सबसे बड़ी चिंता खुद की बीमारी नहीं, बल्कि मां की है। आयुष बार-बार पुलिस से कह रहा है, ‘मां को कुछ मत बताना। मैंने नौकरी करने की बात कहकर घर से निकला था।’

हाथ पर बना है मां के नाम के ये टैटू

आयुष के हाथ पर बना ‘I Love You Mom’ टैटू देखकर ही समझा जा सकता है कि मां के लिए उसके दिल में कितना प्यार है और वो उन्हें कोई तकलीफ देना नही चाहता है। दरअसल, वो घर से मां को यह कहकर निकला था कि नौकरी करने जा रहा हूं। आयुष के पिता के निधन के बाद उसके जीवन में बड़ा बदलाव आ गया। बड़े बेटे होने के नाते घर की पूरी जिम्मेदारी उसके कंधों पर आ गई। परिवार की आर्थिक हालत पहले से ही ठीक नहीं थी।. घर की जमीन गिरवी रखी जा चुकी थी और आमदनी का कोई स्थायी साधन नहीं था।

पिता की मौत के बाद कर्ज में डुबा परिवार

पिता के जाने के बाद आयुष को अपनी  पढ़ाई जारी रखना और खर्च उठाना उसके लिए लगातार मुश्किल होता जा रहा था। पुलिस को पूछताछ में उसने बताया कि दो महीने से वो फीस जमा नहीं कर पाया था। आयुष ने फीस जमा करने के लिए कई प्रयास किए, लेकिन किस्मत कही साथ नहीं दी और वो असफल रहा। आखिरकार में हारकर उसने किडनी बेचने का रास्ता चुन लिया।

फीस भरने के लिए इतने में बेचा किडनी

अवैध किडनी गैंग ने उसे 9-10 लाख रुपये देने का वादा किया था, लेकिन ऑपरेशन के बाद मात्र 3.5 लाख रुपये ही दिए गए। बकाया राशि न मिलने पर आयुष ने पुलिस को फोन कर सूचना दी, जिससे पूरे रैकेट का खुलासा हुआ। बुधवार आयुष की दोस्त उससे मिलने देहरादून से कानपुर पहुंची। पुलिस सुरक्षा में हैलट अस्पताल के छठे तल पर दोनों की 10 मिनट की मुलाकात हुई। महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में हुई इस मुलाकात में आयुष अपनी दोस्त देखते ही फूट-फूटकर रोने लगा आंसू आ गए। उसने हाथ जोड़कर कहा, मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई। मगर मेरी मां को कुछ नहीं बताना।

पुलिस से की मां को लेकर ये अपील

जब पुलिस ने आयुष से परिजनों को सूचित करने की बात कही तो वह रो पड़ा और पुलिसकर्मियों के पैर पकड़कर विनती करने लगा, सर, मेरी मां को कुछ मत बताना। उसके इस हालत को देखकर पुलिस वाले का भी कलेजा पसीज जा रहा है। पूछताछ में आयुष ने बताया कि फीस जमा नहीं कर पाने के कारण दवाब में आ गया था कि पैसे कहां से आएंगे। जमीन पहले से ही गिरवी होने के कारण उसे लोन भी नहीं मिल पा रहा था। हार कर उसने किडनी बेचने का फैसला ले लिया।

यह भी पढ़ें: कानपुर किडनी रैकेट के पर्दाफाश होने के बाद बवाल, दो मरीजों की हालत कैसी?
 



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