
भारत पहली बार डिजिटल जनगणना के लिए पूरी तरह तैयार है। देश में आज, 1 अप्रैल से 16वीं जनगणना का पहला चरण शुरू हो गया है। इस बार जनगणना का पूरा कार्य दो चरणों में पूरा किया जाएगा। इसे दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना कहा जा रहा है। यह प्रक्रिया आज से शुरू होकर 15 तारीख तक चलेगी। हाउस लिस्टिंग और आवास जनगणना 16 अप्रैल से शुरू होगी और 15 मई तक जारी रहेगी।
पहले चरण में ‘मकान सूचीकरण और आवास गणना’ (हाउस लिस्टिंग ऑपरेशंस – HLO) की जाएगी, जिसमें देशभर के मकानों और परिवारों की विस्तृत जानकारी 33 सवालों के माध्यम से ली जाएगी। HLO प्रक्रिया में सभी इमारतों और ढांचों की सूची बनाना, साथ ही आवास की स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं और संपत्तियों के बारे में जानकारी इकट्ठा करना शामिल होगा। इसमें इमारतों की जियो-टैगिंग करना और हर ढांचे को एक विशिष्ट पहचान संख्या (unique identification number) देना भी शामिल होगा।
यह पहली बार है जब जनगणना पूरी तरह डिजिटल तरीके से हो रही है। नागरिकों को घर बैठे अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज करने का भी विकल्प दिया गया है, जिसे सेल्फ-एन्युमरेशन कहा जा रहा है। सरकार ने जनगणना 2027 के पहले चरण के लिए 33 सवालों का सेट पहले ही जारी कर दिया है। यह अभियान 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 के बीच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के कार्यक्रम के अनुसार चलेगा। कोविड-19 महामारी के कारण 2021 में होनी वाली जनगणना अब 2027 में हो रही है।
दूसरा चरण, जो कि ‘जनसंख्या गणना’ है, अगले साल फरवरी महीने में आयोजित किया जाएगा। जाति-आधारित गणना (Caste enumeration) जनगणना के दूसरे चरण का हिस्सा होगी। केंद्र सरकार ने जनगणना-2027 के लिए 11,718 करोड़ रुपये से अधिक के बजट को मंजूरी दी है।
इस बार की जनगणना की सबसे बड़ी खासियत सेल्फ-एन्युमरेशन है। यानि कि लोग घर बैठे भी सारी जानकारी पोर्टल पर भर सकते हैं। नागरिक 16 भाषाओं में वेब पोर्टल के जरिए खुद अपनी और परिवार की जानकारी भर सकेंगे। सर्वे शुरू होने से 15 दिन पहले लोगों को यह सुविधा मिलेगी।
इन राज्यों में 2026 में ही पूरी होगी प्रक्रिया
भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त, मृत्युंजय कुमार नारायण ने यह आश्वासन दिया है कि डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे सर्वेक्षण करने वालों को सटीक और सही जानकारी प्रदान करें। कुछ बर्फीले इलाकों जैसे लद्दाख, जम्मू-कश्मीर के गैर-समकालिक क्षेत्रों तथा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में जनगणना सितंबर 2026 में ही पूरी कर ली जाएगी।